नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2025 – भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन (सैटकॉम) सेवाओं की शुरुआत अब करीब है। दूरसंचार मंत्रालय ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2025 के दौरान हितधारकों के साथ महत्वपूर्ण चर्चाएं कीं और स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण सहित नियामक ढांचे को अंतिम रूप देने पर सहमति बनी। संचार मंत्री ज्योतिरादitya सिंधिया ने कहा कि स्पेक्ट्रम कीमतें तय होने के बाद कंपनियां अपनी रोलआउट योजनाओं के आधार पर सेवाएं शुरू करेंगी। यह कदम देश के दूरस्थ क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने वाला साबित होगा।
सैटकॉम सेवाओं का महत्व और पृष्ठभूमि
सैटकॉम सेवाएं सैटेलाइट के माध्यम से हाई-स्पीड इंटरनेट और कम्युनिकेशन प्रदान करती हैं, जो पारंपरिक फाइबर या टावर-आधारित नेटवर्क के पहुंच से बाहर के इलाकों के लिए आदर्श हैं। भारत जैसे विविध भूगोल वाले देश में, जहां पहाड़ी, जंगल और ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की कमी है, सैटकॉम डिजिटल डिवाइड को पाटने का एक मजबूत माध्यम है।
सरकार ने 2022 में सैटकॉम रिफॉर्म्स लागू किए, जिसके तहत लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया गया। 2023 के टेलीकॉम एक्ट के तहत सैटकॉम स्पेक्ट्रम को प्रशासनिक रूप से आवंटित करने का प्रावधान किया गया, न कि नीलामी से। अब, 2025 में, यह सेक्टर तेजी से विकसित हो रहा है। आईएमसी 2025 में आयोजित पहले सैटकॉम समिट में नीति निर्माताओं, उद्योग नेताओं और विशेषज्ञों ने कनेक्टिविटी गैप्स को भरने पर चर्चा की। दूरसंचार सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि सरकार सैटकॉम प्रदाताओं, नियामक और मंत्रालय के साथ मिलकर नियम, मूल्य निर्धारण, स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा अनुपालन को जल्द अंतिम रूप देगी।
मंत्रालय की चर्चाएं और हितधारकों की भूमिका
दूरसंचार मंत्रालय ने हाल ही में सैटकॉम कंपनियों के साथ सलाहकारी बैठकें आयोजित कीं। जुलाई 2024 में, मंत्री सिंधिया ने भर्ती-समर्थित eutelsat OneWeb और रिलायंस जियो जैसे प्रमुख खिलाड़ियों से मुलाकात की। इन चर्चाओं में अस्थायी स्पेक्ट्रम आवंटन और ब्रॉडबैंड-फ्रॉम-स्पेस सेवाओं की शुरुआत पर जोर दिया गया। कंपनियों ने नियामक प्रक्रिया को तेज करने की मांग की, क्योंकि स्पेक्ट्रम नियमों को अंतिम रूप देने में महीनों लग सकते हैं।
आईएमसी 2025 के दौरान, मंत्रालय ने स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण पर ट्राई (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) से स्पष्टीकरण मांगे हैं। मंत्री सिंधिया ने कहा, “ट्राई को स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण का काम सौंपा गया है, जो जल्द पूरा होगा। उसके बाद कंपनियों की रोलआउट योजनाओं पर निर्भर करेगा।” सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर भी काम चल रहा है, जिसमें डेटा संप्रभुता और कानूनी अवरोधन शामिल हैं। दिसंबर 2024 में, सरकार ने स्पेक्ट्रम को प्रशासनिक रूप से आवंटित करने की पुष्टि की, जो अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए फायदेमंद है।
प्रमुख कंपनियां और उनकी तैयारी
भारत में सैटकॉम बाजार में वैश्विक दिग्गजों की रुचि बढ़ रही है। जून 2025 में, एलन मस्क की स्टारलिंक को दूरसंचार मंत्रालय से व्यावसायिक संचालन के लिए लाइसेंस मिला। स्टारलिंक ने कहा कि वे अनुपालन, सुरक्षा और बेहतरीन अनुभव प्रदान करने के लिए तैयार हैं।
- eutelsat OneWeb: भर्ती एंटरप्राइजेज (एयरटेल की मूल कंपनी) द्वारा समर्थित, इसने लाइसेंस प्राप्त कर लिया है। चेयरमैन सुनील मित्तल ने कहा कि वे हरी झंडी मिलते ही सेवाएं लॉन्च करेंगे।
- जियो सैटेलाइट: रिलायंस जियो और एसईएस की साझेदारी, जिसने लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) प्राप्त किया है। जियो ने सैटकॉम स्पेक्ट्रम के लिए निष्पक्ष आवंटन की मांग की है।
- अन्य: अमेजन की प्रोजेक्ट कुइपर, ग्लोबलस्टार और वोडाफोन आइडिया भी बाजार में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
मई 2025 में, ट्राई ने सैटेलाइट प्रदाताओं को वार्षिक राजस्व का 4% सरकार को देने का प्रस्ताव रखा, जिस पर घरेलू खिलाड़ियों ने आपत्ति जताई।
चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं
सैटकॉम लॉन्च में कुछ चुनौतियां हैं, जैसे स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण में देरी और सुरक्षा मानकों का अनुपालन। मई 2025 में, दूरसंचार विभाग ने सैटकॉम प्रदाताओं के लिए सख्त सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए, जिसमें ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर का 20% भारतीय विनिर्माण से स्रोत करना शामिल है। यह ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देगा।
हालांकि, संभावनाएं रोमांचक हैं। सैटकॉम सेक्टर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा, जो वर्तमान में जीडीपी का 12-14% योगदान देती है और अगले 10-12 वर्षों में 20% तक पहुंच सकती है। दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और ई-कॉमर्स को नई गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सस्ती तकनीक से डिजिटल नेटवर्क का विस्तार संभव होगा।
मंत्री सिंधिया ने जोर दिया कि लॉन्च का समय मंत्रालय तय नहीं करेगा, बल्कि कंपनियों की तैयारी पर निर्भर करेगा। 2026 तक, भारत वैश्विक सैटकॉम बाजार में मजबूत स्थिति बना सकता है।
दूरसंचार मंत्रालय की सक्रियता से सैटकॉम सेवाएं भारत के लिए एक नया युग ला रही हैं। हितधारकों के साथ अंतिम सहमति से अब केवल स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण बाकी है। यह न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगा, बल्कि आर्थिक विकास को भी गति देगा। क्या भारत सैटकॉम क्रांति का अगला केंद्र बनेगा? आने वाले महीने इसका जवाब देंगे।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




