असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा: ‘मियां’ विवाद का केंद्र
गुवाहाटी, 10 अक्टूबर 2025 – असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल ही में एक विवादास्पद बयान देकर फिर से सुर्खियां बटोरी हैं। उन्होंने दावा किया है कि आगामी जनगणना में ‘मियां’ समुदाय (जिसे अक्सर बांग्लादेश मूल के मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है) की आबादी 38 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, जो असम को सबसे बड़ा समुदाय बना देगा। सरमा ने कहा कि वे स्वदेशी हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएंगे। यह बयान असम की राजनीति में ध्रुवीकरण को और गहरा करने वाला साबित हो रहा है।
हिमंता सरमा का राजनीतिक सफर
हिमंता बिस्वा सरमा असम की राजनीति के एक प्रमुख चेहरे हैं। 1970 में जन्मे सरमा ने 2001 में पहली बार जालुकबारी विधानसभा सीट से चुनाव जीता और तब से लगातार पांच बार विधायक चुने जाते रहे हैं। वे पहले कांग्रेस पार्टी के साथ थे और 2001 से 2021 तक राज्य मंत्रिमंडल में विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों जैसे कृषि, वित्त, स्वास्थ्य और शिक्षा का प्रभार संभाला। 2015 में वे भाजपा में शामिल हो गए और 2021 में सरबानंद सोनोवाल की जगह असम के 15वें मुख्यमंत्री बने।
मुख्यमंत्री के रूप में सरमा ने विकास, बाढ़ प्रबंधन और अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर जोर दिया है। उनकी सरकार ने असम समझौते को लागू करने और स्वदेशी संस्कृति की रक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं। हालांकि, उनके बयान अक्सर विवादों का कारण बनते हैं, खासकर धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों पर।
‘मियां’ शब्द का क्या अर्थ?
‘मियां’ शब्द असम में बंगाली-मुस्लिम समुदाय के लिए इस्तेमाल होता है, जो मुख्य रूप से बांग्लादेश से आए प्रवासियों के वंशज हैं। यह शब्द कभी सम्मानजनक था, लेकिन अब यह अपमानजनक माना जाता है। विपक्ष इसे नफरत फैलाने वाला बताता है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले में कहा था कि ‘मियां-तियान’ या ‘पाकिस्तानी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल ‘खराब स्वाद’ का हो सकता है, लेकिन धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला अपराध नहीं। भाजपा इस फैसले का हवाला देकर सरमा के बयानों का बचाव करती है।
विवाद की जड़ें: पिछले बयान और घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब सरमा ने ‘मियां’ समुदाय पर टिप्पणी की हो। अगस्त 2024 में असम विधानसभा में उन्होंने स्पष्ट कहा था, “मैं पक्ष लूंगा और ‘मियां’ मुसलमानों को असम पर कब्जा करने नहीं दूंगा।” यह बयान नागांव में एक 14 वर्षीय लड़की के बलात्कार मामले पर चर्चा के दौरान आया था। सरमा ने अपराध दर को जनसंख्या वृद्धि से जोड़ते हुए कहा कि वे निचले असम के लोगों को ऊपरी असम में जाने से रोकेंगे ताकि ‘मियां’ समुदाय का विस्तार न हो।
इससे पहले, जुलाई 2023 में, राज्यसभा सदस्य अजीत कुमार भुइयां ने सरमा के खिलाफ ‘हेट स्पीच’ की शिकायत दर्ज की थी। उन्होंने ‘मियां’ समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लगाया, जो सांप्रदायिक हमलों का शिकार होता रहा है। सरमा ने जवाब में कहा कि उनकी प्राथमिकता ‘हुसैन ओबामा’ जैसे लोगों से निपटना है, जो पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का संदर्भ था।
अगस्त 2025 में, ऊपरी असम में ‘मियां’ ढूंढने के नाम पर हुई हिंसा पर कांग्रेस ने सरमा को कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का दोषी ठहराया। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने संवैधानिक कर्तव्य निभाने में विफलता दिखाई है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: नफरत की राजनीति?
विपक्षी दल जैसे कांग्रेस और एआईयूडीएफ सरमा के बयानों को लोकतांत्रिक मूल्यों का क्षरण बताते हैं। एआईयूडीएफ और कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा में ‘मियां’ शब्द के इस्तेमाल का विरोध किया। पूर्व जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी सरमा की आलोचना की, कहते हुए कि किसी समुदाय को कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है।
नवंबर 2024 में झारखंड चुनाव के दौरान इंडिया गठबंधन ने सरमा के ‘घुसपैठिए’ वाले बयान पर शिकायत दर्ज की, जिसे भड़काऊ बताया। सरमा ने जवाब दिया कि वे केवल घुसपैठ के खिलाफ बोल रहे हैं।
सरमा का पक्ष: स्वदेशी हितों की रक्षा
सरमा का कहना है कि उनके बयान असम की स्वदेशी आबादी की रक्षा के लिए हैं। उन्होंने कहा, “अगर पिछले 30 वर्षों की सरकारें हमारी तरह काम करतीं, तो आज यह संकट न होता।” वे जनगणना के आंकड़ों का हवाला देकर कहते हैं कि बांग्लादेश मूल के मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। सरमा की सरकार ने संग्रहालयों में प्रदर्शित वस्तुओं को असमिया संस्कृति का हिस्सा बताते हुए सील करने का आदेश दिया, जो विवाद का कारण बना।
असम की राजनीति पर प्रभाव
सरमा के बयान असम में सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा ‘मियां’ जैसे शब्दों को राजनीतिक हथियार बना रही है। वहीं, भाजपा समर्थक इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा बड़ा भूमिका निभाएगा।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




