नई दिल्ली, 7 अक्टूबर 2025: विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने हाल ही में भारत की विदेश नीति पर चर्चा करते हुए एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि जब भारत कमजोर स्थिति में था, तब कोई भी देश सहयोगी के रूप में आगे नहीं आया। यह टिप्पणी भारत के स्वावलंबन और मजबूत विदेश नीति की आवश्यकता पर जोर देती है, जो वैश्विक मंचों पर अक्सर उनकी स्पीच का हिस्सा रही है। जयशंकर का यह बयान नानी पालखीवाला मेमोरियल लेक्चर ‘इंडिया एंड द वर्ल्ड’ में किया गया, जहां उन्होंने भारत की वैश्विक भूमिका और ऐतिहासिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
बयान का संदर्भ और अर्थ
जयशंकर ने अपने भाषण में भारत की आजादी के बाद की कठिनाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि जब देश आर्थिक और सैन्य रूप से कमजोर था, तब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सहयोग नहीं किया। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए बताया कि भारत को अकेले ही अपनी राह बनानी पड़ी। यह बयान आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूत करता है, जहां जयशंकर ने जोर दिया कि अब भारत न केवल अपनी रक्षा कर सकता है, बल्कि वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व भी कर रहा है।
यूएन जनरल असेंबली में उनके हालिया भाषणों में भी इसी थीम का पुर्नरावृत्ति देखी गई, जहां उन्होंने आतंकवाद और सीमा विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को हमेशा अकेले ही खतरे का सामना करना पड़ा। जयशंकर ने पाकिस्तान को वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बताते हुए कहा कि भारत ने हमेशा आत्मरक्षा का अधिकार का प्रयोग किया है, लेकिन जब जरूरत पड़ी, तो सहयोग की कमी महसूस हुई।
भारत की विदेश नीति पर प्रभाव
यह बयान जयशंकर की कूटनीतिक रणनीति को दर्शाता है, जो बहुपक्षीयता पर जोर देती है लेकिन एकतरफा निर्भरता को खारिज करती है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों में सुधार जरूरी है, क्योंकि ऐतिहासिक अन्याय को सुधारना होगा। अफ्रीका जैसे क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, और भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए तैयार है।
26/11 मुंबई हमलों का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि हमला होने पर भारत ने प्रतिक्रिया नहीं दी, जो कमजोरी का प्रतीक था। अब सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है, और राज्य सरकारों को केंद्र के साथ तालमेल बिठाना चाहिए।
प्रतिक्रियाएं और महत्व
जयशंकर के बयान पर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे सकारात्मक बताया, जबकि समर्थकों ने इसे भारत की मजबूती का प्रमाण माना। यह टिप्पणी वैश्विक चुनौतियों जैसे यूक्रेन-गाजा संघर्ष में भारत की भूमिका को भी रेखांकित करती है, जहां जयशंकर ने सभी पक्षों से संवाद की अपील की।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




