वॉशिंगटन, 7 अक्टूबर 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अक्टूबर को घोषणा की कि 1 नवंबर 2025 से अमेरिका में आयात होने वाले सभी मध्यम और भारी ड्यूटी ट्रकों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। यह कदम अमेरिकी ट्रक निर्माताओं को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा, “1 नवंबर 2025 से अन्य देशों से आने वाले सभी मध्यम और भारी ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा।”
यह घोषणा ट्रंप के व्यापार एजेंडे का हिस्सा है, जो पहले स्टील, एल्यूमीनियम और ऑटोमोबाइल पार्ट्स पर शुल्क बढ़ाने में सफल रहा। अप्रैल 2025 में वाणिज्य विभाग ने सेक्शन 232 के तहत ट्रकों के आयात की जांच शुरू की थी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को आधार बनाती है। पहले यह शुल्क 1 अक्टूबर से लागू करने की योजना थी, लेकिन उद्योग की अपील पर तारीख आगे बढ़ा दी गई।
टैरिफ का उद्देश्य और प्रभावित देश
ट्रंप ने कहा कि यह टैरिफ अमेरिकी कंपनियों जैसे पैकार (पीटरबिल्ट और केनवर्थ की मालिक), डेमलर ट्रक (फ्रेटलाइनर) और मैक ट्रक्स को “अनुचित विदेशी प्रतिस्पर्धा” से बचाएगा। अमेरिका में ट्रक उद्योग महत्वपूर्ण है, जो देश के 73% माल ढुलाई का दायित्व निभाता है। मुख्य आयात स्रोत मेक्सिको, कनाडा, जापान, जर्मनी और फिनलैंड हैं, जो अमेरिका के सहयोगी देश हैं। यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इसकी आलोचना की, कहा कि ये देश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं हैं।
यूएसएमसीए (यूएस-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट) के तहत, यदि ट्रक का 64% मूल्य उत्तर अमेरिका से आता है, तो शुल्क मुक्त रह सकता है। लेकिन स्टेलेंटिस (रैम ट्रक्स का उत्पादक) ने मेक्सिको में बने ट्रकों के लिए छूट की मांग की है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे ट्रकों की कीमतें हजारों डॉलर बढ़ सकती हैं, जो लॉजिस्टिक्स और उपभोक्ताओं पर बोझ डालेगा।
ऐतिहासिक संदर्भ: चिकन टैक्स की याद
यह टैरिफ 1964 के “चिकन टैक्स” की याद दिलाता है, जब अमेरिका ने यूरोपीय देशों द्वारा अमेरिकी चिकन पर शुल्क के जवाब में लाइट ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाया था। वह शुल्क आज भी लागू है और विदेशी प्रतिस्पर्धा को सीमित रखता है। ट्रंप की नीति इस पुरानी नीति को मजबूत करती है, लेकिन आलोचक इसे उपभोक्ताओं के लिए महंगाई का कारण बताते हैं।
वैश्विक प्रभाव और प्रतिक्रियाएं
यह कदम वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है, खासकर मेक्सिको से आयात जो 2019 से तिगुना हो चुका है। अमेरिकी ट्रकिंग उद्योग में लागत वृद्धि से महंगाई बढ़ सकती है। भारत पर सीधा असर कम है, क्योंकि वह ट्रक निर्यात नहीं करता। ट्रंप प्रशासन ने अन्य उत्पादों जैसे फर्नीचर और दवाओं पर भी शुल्क बढ़ाए हैं, जो व्यापार युद्ध को तेज कर सकता है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




