गुवाहाटी, 7 अक्टूबर 2025: असम सरकार ने एक संवेदनशील और मानवीय पहल के तहत ‘श्रद्धांजलि’ योजना की आधिकारिक शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य राज्य के बाहर पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में गए छात्रों और युवाओं के शवों को सम्मानपूर्वक उनके घरों तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कैबिनेट बैठक के बाद इसकी घोषणा की, जो दुखी परिवारों के आर्थिक और भावनात्मक बोझ को कम करने के लिए डिजाइन की गई है।
योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
यह योजना जून 2025 में कैबिनेट द्वारा अनुमोदित हुई थी, लेकिन 6 अक्टूबर 2025 को औपचारिक रूप से लॉन्च की गई। इसका प्राथमिक फोकस उन गरीब परिवारों पर है, जिनके सदस्य अन्य राज्यों में निम्न आय वाली नौकरियों या उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि राज्य के बाहर शव लाने का खर्च लगभग 40,000 से 50,000 रुपये होता है, जो कई परिवारों के लिए बोझिल होता है। योजना के तहत सरकार सभी परिवहन खर्च वहन करेगी और कानूनी-प्रक्रियात्मक सहायता भी प्रदान करेगी।
योजना की शुरुआत चेन्नई के एनोर विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में निर्माण स्थल पर दुर्घटना में असम के नौ प्रवासी मजदूरों की मौत के बाद हुई, जिनके शवों को तमिलनाडु सरकार द्वारा विशेष उड़ान से वापस लाया गया। सरमा ने बताया कि योजना लॉन्च होने से पहले ही अनौपचारिक रूप से 24 शवों को सम्मान के साथ वापस लाया गया है।
लाभार्थी और कार्यान्वयन
‘श्रद्धांजलि’ योजना उन छात्रों और युवाओं को कवर करेगी जो राज्य के बाहर पढ़ाई या काम के लिए जाते हैं, लेकिन चिकित्सा उपचार के लिए बाहर गए व्यक्तियों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। धनी परिवारों या जो खुद व्यवस्था कर सकें, उन्हें इससे बाहर रखा गया है। असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच, गृह एवं राजनीतिक विभाग के अधीन इसकी कार्यान्वयन सुनिश्चित करेगी।
परिवार या परिचित असम सरकार से संपर्क कर सकते हैं। सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध हैं: 112 (पुलिस कंट्रोल रूम), 0361-2381511 (स्पेशल ब्रांच कंट्रोल रूम), +91 91810-14888 (व्हाट्सएप), या सेवा सेटू पोर्टल। जानकारी प्राप्त करने या मुख्य सचिव/मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधे संपर्क किया जा सकता है। अस्वाभाविक मौत के मामलों में स्पेशल ब्रांच कानूनी सहायता भी देगी।
व्यापक प्रभाव
यह योजना असम के प्रवासी युवाओं के परिवारों को भावनात्मक समर्थन प्रदान करेगी, जो अक्सर आर्थिक तंगी से जूझते हैं। सरमा ने इसे एक मानवीय पहल बताया, जो दुखी परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए प्रियजन का शव घर लाने में मदद करेगी। असम सरकार की यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल हो सकता है, जहां प्रवासियों की संख्या अधिक है। योजना के माध्यम से सरकार सामाजिक कल्याण और सम्मानजनक विदाई सुनिश्चित करने की दिशा में मजबूत कदम उठा रही है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




