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बार काउंसिल ने मुख्य न्यायाधीश गवई पर जूता फेंकने वाले वकील को निलंबित किया: सुप्रीम कोर्ट में हंगामा-शालू पांडेय, अधिवक्ता, लखनऊ, उच्च न्यायालय (एमडी, शालू लॉ फर्म)

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर 2025: सुप्रीम कोर्ट में एक अभूतपूर्व घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया, जब एक 71 वर्षीय वकील ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बी.आर. गवई पर जूता फेंकने का प्रयास किया। इस घटना के तुरंत बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने आरोपी वकील राकेश किशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले आचरण को लेकर की गई है, और अब अनुशासनात्मक जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

घटना का विवरण

सोमवार सुबह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान वकील राकेश किशोर (नामांकन संख्या डी/1647/2009) ने अचानक अपना स्पोर्ट्स जूता उतार लिया और सीजेआई गवई की ओर फेंकने का प्रयास किया। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया और कोर्ट कक्ष से बाहर निकाल दिया। किशोर ने इस कृत्य का कारण ‘सनातन धर्म’ का अपमान बताया, दावा किया कि मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान सनातन धर्म का मजाक उड़ाया।

घटना के बाद किशोर ने कोई पछतावा न जताते हुए अजीबोगरीब दावे किए। उन्होंने कहा कि उनका कार्य न्याय के हित में था और वे अपने कृत्य पर गर्व महसूस कर रहे हैं। यह घटना सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही को कुछ देर के लिए बाधित कर गई, जिससे न्यायिक मर्यादा पर सवाल उठे।

बार काउंसिल की त्वरित कार्रवाई

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस घटना की निंदा करते हुए राकेश किशोर को पूरे देश में वकालत करने से निलंबित कर दिया। बीसीआई के अनुसार, यह आचरण “अदालत की गरिमा के अनुरूप नहीं” है और वकील के पेशेवर आचरण के उल्लंघन का स्पष्ट उदाहरण है। निलंबन तत्काल प्रभाव से लागू है, और अब अनुशासन समिति द्वारा विस्तृत जांच की जाएगी। यदि दोषी पाए गए, तो स्थायी निष्कासन की भी संभावना है।

बीसीआई अध्यक्ष मनन मिश्रा ने कहा, “वकील अदालत के अधिकारी होते हैं, न कि उपद्रवी। ऐसी घटनाएं न्याय व्यवस्था की नींव को कमजोर करती हैं।” यह कार्रवाई वकीलों के बीच अनुशासन बनाए रखने के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

इस घटना पर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी दलों ने न्यायपालिका की सुरक्षा पर सवाल उठाए, जबकि सत्ताधारी दल ने इसे “व्यक्तिगत हताशा” का परिणाम बताया। हिंदू संगठनों ने किशोर के ‘सनातन धर्म’ के दावे पर बहस छेड़ दी, लेकिन अधिकांश ने हिंसक कृत्य की निंदा की।

सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने का फैसला लिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला वकीलों के आचरण नियमों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।

यह घटना भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए एक काला अध्याय साबित हुई है, जो न्यायाधीशों की गरिमा और अदालत की पवित्रता को रेखांकित करती है। जांच के परिणामों का इंतजार अब पूरे देश कर रहा है।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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