वाशिंगटन/जेरूसलम, 1 अक्टूबर 2025: मध्य पूर्व में शांति की नई उम्मीदें जागी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तुत 20-सूत्री गाजा शांति योजना ने क्षेत्रीय समीकरण बदल दिए हैं। इजरायल को मजबूत समर्थन मिला है, जबकि सऊदी अरब, पाकिस्तान, इंडोनेशिया जैसे प्रमुख मुस्लिम देशों ने अप्रत्याशित रूप से योजना का स्वागत किया है। हमास पर स्वीकार करने का दबाव बढ़ रहा है, जिसकी समय सीमा तीन-चार दिन निर्धारित है। यह विकास अमेरिका-इजरायल गठबंधन को और सशक्त बनाते हुए मुस्लिम दुनिया में विभाजन पैदा कर रहा है।
ट्रंप की 20-सूत्री योजना: शांति का नया ब्लूप्रिंट
ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को गाजा युद्ध समाप्त करने के लिए 20-सूत्री योजना का खुलासा किया। योजना में गाजा का पुनर्निर्माण, फिलिस्तीनी प्रशासन में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी और इजरायल की सुरक्षा गारंटी मुख्य बिंदु हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार, नया गाजा प्रशासन फिलिस्तीनियों और विश्व के “योग्य विशेषज्ञों” से बनेगा। योजना का उद्देश्य युद्ध समाप्त कर स्थिरता लाना है, जिसमें कतर जैसे मध्यस्थों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
ट्रंप ने कहा, “हमास के पास तीन-चार दिन हैं योजना स्वीकार करने के लिए।” यह योजना क्षेत्रीय शांति के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है, लेकिन आलोचक इसे इजरायल-समर्थक बताते हैं।
इजरायल का जोरदार समर्थन: नेतन्याहू की साहसिक शर्त
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने योजना का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह योजना इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाएगी। हालांकि, घरेलू स्तर पर गठबंधन साझेदारों से टकराव की आशंका है, जो किसी भी फिलिस्तीनी रियायत के खिलाफ हैं। नेतन्याहू की यह शर्त विदेशी समर्थन हासिल करने की कोशिश है, लेकिन आंतरिक जोखिम बढ़ा रही है।
इजरायल के गाजा अभियान ने मध्य पूर्व के कई देशों को इजरायल को साझा खतरा मानने पर मजबूर किया है। फिर भी, ट्रंप योजना ने इजरायल को नया वैश्विक समर्थन दिलाया है।
मुस्लिम देशों का अप्रत्याशित रुख: सऊदी-पाकिस्तान का गठजोड़
मुस्लिम दुनिया में विभाजन साफ दिख रहा है। सऊदी अरब और पाकिस्तान ने ट्रंप योजना का समर्थन किया है, जिसे पाकिस्तान में इजरायल को औपचारिक मान्यता के समकक्ष देखा जा रहा है। एशिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया ने भी योजना का स्वागत किया, लेकिन जनता में बैकलैश की आशंका है।
अरब और मुस्लिम राष्ट्राध्यक्ष हमास पर दबाव डाल रहे हैं कि वह योजना स्वीकार करे, ताकि युद्ध समाप्त हो। कतर को अमेरिकी कार्यकारी आदेश से सुरक्षा गारंटी मिली है, इजरायली हमले के बाद। ट्रंप ने कतर को “शांति और स्थिरता में दृढ़ सहयोगी” बताया।
हालांकि, कुछ अरब-मुस्लिम नेता इसे “महान विश्वासघात” बता रहे हैं, जो इजरायल के गाजा अभियान को पुरस्कृत करता है।
अमेरिका की भूमिका: मध्यस्थता और सुरक्षा गारंटी
अमेरिका ने योजना के जरिए मध्य पूर्व में अपनी केंद्रीय भूमिका दोहराई है। ट्रंप प्रशासन ने यूरोप, इजरायल और मुस्लिम देशों से समर्थन हासिल किया है। कतर को सुरक्षा गारंटी देकर अमेरिका ने मध्यस्थता को मजबूत किया। यह कदम अमेरिका-इजरायल संबंधों को नई ऊंचाई दे रहा है, जबकि मुस्लिम देशों के साथ सामरिक साझेदारी बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हमास स्वीकार करता है, तो सामान्यीकरण की प्रक्रिया तेज हो सकती है। अन्यथा, क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है।
निहितार्थ: शांति या नया संकट?
ट्रंप योजना मध्य पूर्व के नए समीकरण का संकेत दे रही है। इजरायल-अमेरिका गठबंधन मजबूत हो रहा है, जबकि मुस्लिम देशों में समर्थन-विरोध का द्वंद्व उभर रहा है। यदि सफल हुई, तो यह क्षेत्रीय शांति का मार्ग प्रशस्त करेगी; वरना, गाजा संकट और गहरा सकता है। हमास की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




