नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2025: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के खिलाफ प्रस्तावित भारत बंद को स्थगित कर दिया है। 3 अक्टूबर को होने वाली यह हड़ताल धार्मिक त्योहारों के साथ टकराव के कारण टाली गई है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन की गति धीमी नहीं पड़ेगी और नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। यह फैसला मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा के लिए बोर्ड के दूसरे चरण के विरोध अभियान का हिस्सा है।
स्थगित भारत बंद का विवरण
AIMPLB ने 24 सितंबर को वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ देशव्यापी भारत बंद का आह्वान किया था। यह बंद सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक प्रस्तावित था, जिसमें दुकानें, कार्यालय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की गई थी। हालांकि, आवश्यक सेवाओं जैसे अस्पतालों, फार्मेसियों और चिकित्सा सुविधाओं को इससे छूट दी गई थी। बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा, “त्योहारों के कारण कुछ राज्यों में असुविधा हो सकती थी, इसलिए हमने इसे स्थगित करने का निर्णय लिया। लेकिन वक्फ कानून के खिलाफ हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”
बोर्ड के महासचिव मौलाना सैयद मुहम्मद इलियास ने बयान जारी कर कहा, “भारत बंद स्थगित है, लेकिन इंशाअल्लाह, नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। वक्फ संस्थाओं की स्वायत्तता पर हमला करने वाले इस कानून के खिलाफ अन्य विरोध कार्यक्रम निर्धारित अनुसार चलेंगे।” यह स्थगन बोर्ड की रणनीतिक चाल मानी जा रही है, ताकि आंदोलन का प्रभाव कम न हो।
वक्फ संशोधन कानून पर विवाद
वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को AIMPLB ने मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए खारिज किया है। बोर्ड का दावा है कि यह कानून वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता को कमजोर करता है और गैर-मुस्लिमों को बोर्ड में शामिल करने का प्रावधान संवैधानिक है। कानून में वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण, सर्वेक्षण और प्रबंधन में बदलाव प्रस्तावित हैं, जिसे सरकार पारदर्शिता बढ़ाने का बताती है, लेकिन विपक्ष इसे हस्तक्षेप मानता है।
पिछले महीनों में AIMPLB ने धरना, जुलूस और विरोध सभाओं का आयोजन किया था। बोर्ड का कहना है कि यह कानून मुस्लिमों की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है और इसे वापस लेना चाहिए।
प्रतिक्रियाएं और आलोचना
इस स्थगन पर मुस्लिम समुदाय में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। बरेली के प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु शाहाबुद्दीन रजवी ने AIMPLB के फैसले का समर्थन करते हुए कहा, “यह बंद विफल बनाने का समय है। मुसलमानों को अपने कारोबार खुले रखने चाहिए और दैनिक कार्यों में लगे रहना चाहिए।” उन्होंने बोर्ड के कार्यक्रमों में भाग न लेने की अपील की, इसे सामुदायिक एकता के लिए हानिकारक बताया।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने बोर्ड के आंदोलन का समर्थन किया है, जबकि भाजपा ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। बोर्ड के कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर #SaveWaqf और #AgainstWaqfBill जैसे हैशटैग के साथ संदेश साझा कर रहे हैं।
भविष्य की योजनाएं
AIMPLB ने स्पष्ट किया है कि वक्फ कानून के खिलाफ अन्य कार्यक्रम जैसे विरोध रैलियां और कानूनी लड़ाई जारी रहेंगी। बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। नई भारत बंद की तारीख एक-दो दिनों में घोषित होने की संभावना है, ताकि त्योहारों के बाद अधिक प्रभाव डाला जा सके।
यह घटना मुस्लिम समुदाय की एकजुटता को दर्शाती है, लेकिन आंतरिक मतभेद भी उजागर कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड को रणनीतिक रूप से आगे बढ़ना होगा, ताकि आंदोलन व्यापक समर्थन हासिल कर सके।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




