जलवायु कार्यकर्ता और लद्दाख से मिली प्रसिद्धि वाले सोनम वांगचुक की पत्नी गितांजलि एंगमो ने 1 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अपने पति की अभी तक रिहाई की याचिका की है। पत्र की एक प्रति प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई है।
उनका यह कदम उस पखवाड़े की घटनाओं के बीच आया है, जब वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के अंतर्गत हाशिये पर ला दिया गया, और उन्हें जोधपुर जेल ले जाया गया।
क्या कहा गया पत्र में? — प्रमुख बिंदु
गितांजलि एंगमो के पत्र में निम्नलिखित मुख्य दावे और अपील की गई हैं:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| संवाद रोका जाना | उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के बाद से उन्हें अपने पति से फोन या सीधे संवाद करने की अनुमति नहीं मिली। |
| स्वास्थ्य व दवाओं की चिंता | पत्र में उल्लेख है कि उन्हें यह पता नहीं कि वांगचुक को ताजे कपड़े, दवाइयाँ आदि उपलब्ध कराई गई हैं या नहीं, विशेषकर हाल ही में उन्होंने 15 दिनों का उपवास किया था जो उन्हें शारीरिक रूप से कमजोर कर दिया। |
| अन्याय व निगरानी आरोप | उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य एवं उसकी एजेंसियों ने उन पर निगरानी शुरू की है, संस्थान के कर्मचारियों पर दबाव है और “witch-hunt” (चम्मड़-हटाना अभियान) चलाया जा रहा है। |
| शांतिपूर्ण काम और राष्ट्रीय सेवा | गितांजलि ने यह कहा कि उनके पति राष्ट्रविरोधी नहीं हैं — बल्कि उन्होंने लद्दाख और पर्यावरण के लिए काम किया है। उन्होंने यह भी लिखा कि उन्होंने भारतीय सेना के लिए आश्रय (shelters) बनाये हैं। |
| संवैधानिक अधिकारों का हवाला | उन्होंने संविधान की धारा 21 और 22 का हवाला दिया — कि हर नागरिक को जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है और गिरफ्तारी या हिरासत में कानूनी प्रक्रिया (due process) सुनिश्चित होनी चाहिए। |
| अप्रत्यक्ष रिहाई की मांग | पत्र में राष्ट्रपति से निवेदन है कि उन्हें “unconditional release” (बिना शर्त रिहाई) दी जाए। |
पत्र में लिखा है —
“Is it a crime to speak about climate change, melting glaciers, educational reforms … ? … It certainly cannot be termed as a threat to national security.”
उन्होंने राष्ट्रपति को यह भी लिखा कि, being from a tribal community (आदिवासी पृष्ठभूमि) होने के नाते, वे लद्दाख और चुनिंदा क्षेत्रों की संवेदनाओं को समझ सकती हैं। पृष्ठभूमि — वे क्यों गिरफ्तार हुए?
-
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को लेह (लद्दाख) में हिरासत में लिया गया, NSA की धारा 3(2) के अंतर्गत।
-
यह गिरफ्तारी उस विरोध प्रदर्शन के बाद हुई जिसमें छठी अनुसूची (Sixth Schedule) संरक्षण और लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग शामिल थी।
-
राज्य प्रशासन ने कहा है कि कार्रवाई “विश्वसनीय इनपुट” के आधार पर की गई — जबकि गितांजलि का दावा है कि अभियुक्त के खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं।
-
उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के समय वांगचुक को अपने कपड़े ले जाने की अनुमति नहीं दी गई थी।
प्रतिक्रियाएँ और विवाद
-
राज्य प्रशासन और लद्दाख प्रशासन ने गितांजलि के आरोपों का खंडन किया है, यह कहते हुए कि सभी कार्रवाई “credible inputs” पर आधारित है।
-
गितांजलि ने स्पष्ट किया कि आरोपों में “anti-national” ठहराया जाना पूरी तरह मिथ्या है और यह एक रणनीति है उन्हें बदनाम करने की।
-
समर्थक, नागरिक समाज और अन्य कार्यकर्ताओं ने भी उनकी रिहाई के लिए आवाज़ उठानी शुरू कर दी है।
आगे की राह
इस समय, गितांजलि एंगमो का पत्र राष्ट्रीय राजनीति, मानवाधिकार और संवैधानिक अधिकारों की एक संवेदनशील टकराव की स्थिति के केंद्र में खड़ा है। उन्होंने राष्ट्रपति को न सिर्फ व्यक्तिगत मोराल और संवेदनशीलता की गुहार लगाई है, बल्कि यह भी रेखांकित किया है कि एक लोकतंत्र में शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति, शिक्षा, पर्यावरण-संबंधी चेतना और क्षेत्रीय स्वायत्तता की मांग को कैसे चुनौती दी जाती है।
आगे का मार्ग देखना होगा — क्या राष्ट्रपति या अन्य संवैधानिक संस्थान इस अपील पर सकारात्मक कदम उठाते हैं, या कानूनी प्रक्रिया ऐसी होगी कि वांगचुक की रिहाई संभव हो।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




