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फिनिश कंपनी ICEYE भारत के लिए सिग्नेचर रडार माइक्रोसैटेलाइट्स बनाएगी, सरकार को पूर्ण नियंत्रण: रक्षा क्षमताओं में नया आयाम

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2025: फिनलैंड की प्रमुख सैटेलाइट कंपनी ICEYE भारत के साथ एक ऐतिहासिक साझेदारी की घोषणा करने जा रही है। कंपनी भारत में सिग्नेचर रडार (सिंथेटिक एपर्चर रडार – SAR) आधारित माइक्रोसैटेलाइट्स का विकास और लॉन्च करेगी, जिनका पूर्ण नियंत्रण और संप्रभुता भारतीय सरकार के पास होगी। यह सौदा भारत की रक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा, खासकर सीमा सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण निगरानी के क्षेत्र में।

सौदे की मुख्य विशेषताएं

ICEYE, जो दुनिया की सबसे बड़ी SAR सैटेलाइट कांस्टेलेशन का संचालन करती है, भारत के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए माइक्रोसैटेलाइट्स विकसित करेगी। इन सैटेलाइट्स को लॉन्च करने के बाद कंपनी इन्हें भारतीय सरकार को सौंप देगी, जिससे भारत को पूर्ण संचालन और डेटा नियंत्रण मिलेगा। कंपनी ने पहले ही भारत सरकार को 10,000 से अधिक SAR इमेज प्रदान की हैं, जिनमें प्रतिदिन 20 तक रीविजिट अवसर उपलब्ध हैं। यह साझेदारी भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप है, क्योंकि इसमें स्थानीय निर्माण और तकनीकी हस्तांतरण पर जोर दिया जाएगा।

ICEYE के सीईओ राफेल चांग ने कहा, “भारत एक तेजी से उभरता हुआ स्पेस पावर है। हमारी SAR तकनीक, जो मौसम की परवाह किए बिना उच्च रेजोल्यूशन इमेज प्रदान करती है, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया को मजबूत करेगी। हम पूर्ण संप्रभुता सुनिश्चित करते हैं।”

ICEYE का परिचय और SAR तकनीक

ICEYE फिनलैंड की एक अग्रणी स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो 2015 में स्थापित हुई। कंपनी ने अब तक 24 से अधिक SAR सैटेलाइट्स लॉन्च किए हैं, जो लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में तैनात हैं। SAR तकनीक रडार तरंगों का उपयोग करके पृथ्वी की सतह की उच्च गुणवत्ता वाली इमेज कैप्चर करती है, जो बादलों, धुंध या रात के समय भी काम करती है। यह तकनीक सैन्य निगरानी, शिप डिटेक्शन, वन कटिंग और बाढ़ जैसी घटनाओं के लिए आदर्श है।

2025 में ICEYE ने चार नए सैटेलाइट्स लॉन्च किए हैं और सालाना 20 से अधिक लॉन्च करने की योजना है। कंपनी ने NATO और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ भी साझेदारी की है, लेकिन भारत के साथ यह पहली बार है जब पूर्ण नियंत्रण सरकारी एजेंसी को सौंपा जा रहा है।

भारत के लिए महत्व: रक्षा और नागरिक उपयोग

यह सौदा भारत की स्पेस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट (DST) और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के लिए महत्वपूर्ण है। सीमा पर निगरानी, दुश्मन गतिविधियों का पता लगाना और प्राकृतिक आपदाओं में त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत को चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के मुकाबले मजबूत बनाएगा।

इसके अलावा, नागरिक क्षेत्र में कृषि, शहरी नियोजन और पर्यावरण संरक्षण में भी इसका उपयोग होगा। भारत सरकार ने हाल ही में ISRO के माध्यम से SAR सैटेलाइट्स पर जोर दिया है, और यह साझेदारी उस दिशा में एक बड़ा कदम है।

राजनीतिक और उद्योग प्रतिक्रियाएं

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा, “ICEYE के साथ यह साझेदारी भारत की स्पेस संप्रभुता को मजबूत करेगी। हम तकनीकी हस्तांतरण पर विशेष ध्यान देंगे।” विपक्षी दलों ने भी इसे सकारात्मक बताया, हालांकि कुछ ने स्थानीय उद्योग की भागीदारी बढ़ाने की मांग की।

स्पेस इंडस्ट्री के विशेषज्ञों ने इसे “गेम चेंजर” करार दिया। ट्विटर पर #ICEYEIndia ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स भारत की बढ़ती स्पेस क्षमताओं पर चर्चा कर रहे हैं।

भविष्य की संभावनाएं

ICEYE और भारत के बीच यह साझेदारी 2026 तक पहले सैटेलाइट्स के लॉन्च के साथ शुरू हो सकती है। कंपनी ने भारत में उत्पादन इकाई स्थापित करने का भी संकेत दिया है, जो हजारों नौकरियां पैदा करेगी। यह सौदा न केवल रक्षा बलों को मजबूत करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक स्पेस मार्केट में नया स्थान दिलाएगा।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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