नई दिल्ली, 30 सितंबर 2025 – सरकारी नौकरी को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाने वाले एक राजस्व अधिकारी की कहानी ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। महज 50 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम करने वाले इस अधिकारी के नाम पर 41 प्लॉट, लग्जरी घर और 50 करोड़ रुपये से अधिक की अघोषित संपत्ति का खुलासा हुआ है। एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की छापेमारी में यह मामला सामने आया, जो सरकारी अमले में व्याप्त भ्रष्टाचार की काली सच्चाई को बेनकाब करता है। यह घटना न केवल एक व्यक्ति की लालच की कहानी है, बल्कि सिस्टम की कमजोरियों पर सवाल खड़े करती है।
मामला कैसे फूटा?
यह खुलासा 29 सितंबर 2025 को ACB की एक आश्चर्यजनक छापेमारी के दौरान हुआ। राजस्व विभाग में तहसीलदार के पद पर तैनात 45 वर्षीय अधिकारी, जिनका नाम अभी गोपनीय रखा गया है, पर शिकायत दर्ज हुई थी कि वे जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर अवैध कमाई कर रहे हैं। ACB टीम ने उनके निवास, रिश्तेदारों के घरों और विभिन्न प्लॉट साइट्स पर एक साथ दबिश दी। छापे में नकदी, सोने-चांदी के गहने, वाहन और जमीन के दस्तावेज बरामद हुए।
अधिकारी के नाम पर दर्ज 41 प्लॉटों की कुल कीमत करीब 35 करोड़ रुपये आंकी गई है। इनमें से अधिकांश प्लॉट शहर के पॉश इलाकों में हैं, जहां कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके अलावा, एक 3,300 वर्ग फुट का लग्जरी फ्लैट, 9 लग्जरी वाहन (जिनमें दो विदेशी कारें शामिल हैं) और 250 ग्राम सोना-चांदी के आभूषण भी जब्त किए गए। कुल अघोषित संपत्ति का मूल्य 50 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। ACB के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह संपत्ति उनके ज्ञात आय स्रोतों से 10 गुना अधिक है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि अधिकारी ने जमीन आवंटन, म्यूटेशन और रिकॉर्ड सुधार के नाम पर रिश्वतखोरी की है।”
भ्रष्टाचार का जाल: कैसे बन गया ‘करोड़पति’?
जांच एजेंसी के अनुसार, अधिकारी ने पिछले 10 वर्षों में विभिन्न योजनाओं के तहत जमीनों के फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। वे राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव के बदले बिल्डरों और प्रभावशाली लोगों से कमीशन लेते थे। एक स्रोत ने बताया कि एक ही प्लॉट के लिए 5-10 लाख रुपये तक की रिश्वत ली जाती थी। इसके अलावा, बेनामी खातों के जरिए नकदी का लेन-देन होता था। छापे में 1 करोड़ रुपये नकद भी बरामद हुए, जो संभवतः हवाला के जरिए जमा किए गए थे।
यह मामला झारखंड के रांची में सामने आया, जहां हाल ही में शराब घोटाले में 38 करोड़ के राजस्व नुकसान का मामला उजागर हुआ था। ACB ने 41 स्थानों पर छापे मारे, जिसमें अधिकारी के रिश्तेदारों के नाम पर भी संपत्तियां पाई गईं। एक सहयोगी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “सरकारी नौकरी आजकल ‘फास्ट ट्रैक’ से अमीर बनने का जरिया बन गई है। यह अधिकारी सामान्य दिखता था, लेकिन पीछे से करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर चुका था।”
समाज पर असर: क्यों बढ़ रही है ऐसी घटनाएं?
यह घटना भारत में भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर करती है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 62% लोग सरकारी सेवाओं के लिए रिश्वत देते हैं। राजस्व विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में यह समस्या और गंभीर है, जहां जमीन से जुड़े फैसले करोड़ों का खेल खेलते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटलीकरण और सख्त निगरानी की कमी से ऐसी साजिशें पनप रही हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता रवि शर्मा ने कहा, “ऐसे अधिकारी युवाओं के लिए सरकारी नौकरी को कलंकित कर रहे हैं। सख्त सजा और संपत्ति जब्ती ही इसका समाधान है।” विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा, दावा किया कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के वादे खोखले साबित हो रहे हैं।
आगे की कार्रवाई: न्याय की उम्मीद
ACB ने अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ जारी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी मामले में शामिल किया जा सकता है, क्योंकि मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत मिले हैं। जांच पूरी होने पर संपत्ति जब्ती और आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा। यह मामला न केवल एक व्यक्ति को सजा देगा, बल्कि पूरे सिस्टम में सुधार की मांग को तेज करेगा।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




