एसएसएन न्यूज डेस्क | 28 सितंबर, 2025
विश्व खाद्य भारत 2025 शिखर सम्मेलन ने भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को एक अभूतपूर्व बढ़ावा दिया है। सम्मेलन के समापन पर 26 घरेलू और वैश्विक कंपनियों के साथ 1.02 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह सौदा न केवल रोजगार सृजन को गति देगा, बल्कि भारत को वैश्विक खाद्य बाजार में मजबूत स्थिति दिलाने में भी सहायक होगा।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने रविवार को घोषणा की कि इस शिखर सम्मेलन के दौरान कुल 1.02 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रतिबद्धताएं प्राप्त हुई हैं। इनमें वैश्विक दिग्गजों जैसे नेस्ले, पेप्सिको और घरेलू कंपनियों की भागीदारी शामिल है। मंत्रालय के अनुसार, ये निवेश खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, आपूर्ति श्रृंखला विकास और निर्यात-उन्मुख परियोजनाओं पर केंद्रित होंगे, जो भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यह सौदा भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र वर्तमान में देश के कुल खाद्य उत्पादन का मात्र 10 प्रतिशत ही संसाधित करता है, जबकि विकसित देशों में यह आंकड़ा 60-70 प्रतिशत तक पहुंचता है। इन निवेशों से अनुमानित 64,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इस क्षेत्र को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की कुंजी बताया था, और यह सौदा उनकी दृष्टि को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन ही 25,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त समझौते हुए थे, जिससे कुल मूल्य 1.02 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “ये निवेश भारत को खाद्य सुरक्षा और निर्यात में वैश्विक नेता बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। हमारी कृषि विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़कर हम किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करेंगे।” सम्मेलन में भाग लेने वाली कंपनियां नई प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और सस्टेनेबल पैकेजिंग पर फोकस करेंगी।
यह निवेश भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा अवसर है, खासकर जब वैश्विक खाद्य संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच देश अपनी कृषि क्षमता को मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निर्यात में 20-25 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, जो किसानों को सीधा लाभ पहुंचाएगा। विश्व खाद्य भारत जैसे मंच भारत को निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने में सफल साबित हो रहे हैं।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




