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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ‘जॉली एलएलबी 3’ के खिलाफ याचिका खारिज की: कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं-शालू पांडे, अधिवक्ता, विधि संपादक एसएसएन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2025 को अक्षय कुमार और अरशद वारसी अभिनीत आगामी बॉलीवुड फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ के खिलाफ दायर एक याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में फिल्म और इसके गाने ‘भाई वकील है’ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि यह न्यायपालिका और वकालत पेशे को बदनाम करता है। कोर्ट ने फिल्म के ट्रेलर और गाने की समीक्षा के बाद इसे आपत्तिजनक नहीं पाया। यह लेख इस मामले के विवरण, कोर्ट के फैसले और इसके प्रभावों पर प्रकाश डालता है।

याचिका का विवरण

याचिका जय वर्धन शुक्ला और एक अन्य वकील द्वारा लखनऊ बेंच में दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने निम्नलिखित मांगें की थीं:

  • फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ की रिलीज, प्रदर्शन और स्क्रीनिंग पर रोक।

  • गाने ‘भाई वकील है’ को सभी डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाना।

  • सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) द्वारा फिल्म को दी गई मंजूरी को रद्द करना।

  • फिल्म निर्माताओं और प्रोड्यूसर्स को वकीलों के कथित अपमानजनक चित्रण के लिए सार्वजनिक माफी मांगने का निर्देश।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि फिल्म का ट्रेलर और गाना न्यायपालिका और वकालत पेशे को अपमानजनक और निंदनीय ढंग से चित्रित करता है। उन्होंने दावा किया कि यह चित्रण वकीलों की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, जो अदालत के अधिकारियों के रूप में कार्य करते हैं, और इससे कानून के छात्रों में निराशा पैदा हो सकती है, जिससे न्याय वितरण प्रणाली प्रभावित होगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस बृज राज सिंह की डिवीजन बेंच ने याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने निम्नलिखित आधारों पर याचिका को खारिज कर दिया:

  1. कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं: बेंच ने यूट्यूब और सोशल मीडिया पर उपलब्ध फिल्म के तीन आधिकारिक ट्रेलर/टीजर और गाने ‘भाई वकील है’ के बोल की समीक्षा की। कोर्ट ने कहा, “हमने ट्रेलर और गाने के बोल देखे और हमें कोई ऐसी सामग्री नहीं मिली जो न्यायपालिका या वकालत पेशे को बदनाम करती हो या इसमें हस्तक्षेप करती हो।”

  2. वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं: केंद्र सरकार की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल एस.बी. पांडे ने याचिका की वैधानिकता पर सवाल उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया नैतिकता संहिता) नियम, 2021 के तहत सीबीएफसी या अन्य प्राधिकरण से संपर्क नहीं किया। कोर्ट ने इस आपत्ति को स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

  3. कोई लागत नहीं: कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं पर कोई जुर्माना नहीं लगाया और याचिका को बिना किसी लागत के खारिज कर दिया।

कोर्ट ने यह भी कहा, “हमने गाने ‘भाई वकील है’ के बोल देखे और हमें इसमें कुछ भी ऐसा नहीं मिला जो वास्तविक वकीलों के पेशे में हस्तक्षेप करे।”

फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ का परिदृश्य

‘जॉली एलएलबी 3’ लोकप्रिय कोर्टरूम कॉमेडी फ्रैंचाइज़ी का तीसरा भाग है, जिसकी शुरुआत 2013 में अरशद वारसी और सौरभ शुक्ला अभिनीत पहली फिल्म से हुई थी। 2017 में रिलीज दूसरी फिल्म में अक्षय कुमार और हुमा कुरैशी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। तीसरा भाग, जिसे सुभाष कपूर ने लिखा और निर्देशित किया है, में अक्षय कुमार, अरशद वारसी, सौरभ शुक्ला, हुमा कुरैशी, अमृता राव और गजराज राव जैसे सितारे शामिल हैं। यह फिल्म 19 सितंबर 2025 को रिलीज होने वाली है।

अन्य कानूनी चुनौतियां

हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया, लेकिन ‘जॉली एलएलबी 3’ को अन्य स्थानों पर भी कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:

  • पुणे में मामला: 20 अगस्त 2025 को, पुणे की एक अदालत ने वकील वाजिद खान बिदकर की शिकायत पर अक्षय कुमार और अरशद वारसी को नोटिस जारी किया। बिदकर ने आरोप लगाया कि फिल्म न्यायपालिका और कोर्ट की कार्यवाही को हास्यास्पद बनाती है, विशेष रूप से एक दृश्य में जिसमें जजों को “मामू” कहा गया। दोनों अभिनेताओं को 28 सितंबर को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया गया है।

  • अजमेर में शिकायत: मई 2024 में, अजमेर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रभान ने फिल्म निर्माताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज की, जिसमें दावा किया गया कि फ्रैंचाइज़ी भारतीय न्यायपालिका का अनुचित और अपमानजनक चित्रण करती है।

  • पटना और मध्य प्रदेश में याचिकाएं: फिल्म को पटना और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी जनहित याचिकाओं (PIL) के माध्यम से चुनौती दी जा रही है, जिसमें न्यायपालिका के प्रति अनादर का आरोप लगाया गया है।

प्रभाव और विश्लेषण

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला फिल्म निर्माताओं के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि यह फिल्म की रिलीज को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ने की अनुमति देता है। कोर्ट के इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि सेंसर बोर्ड द्वारा प्रमाणित सामग्री को तब तक आपत्तिजनक नहीं माना जा सकता, जब तक कि ठोस सबूत न हों। यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और रचनात्मकता के समर्थन में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

हालांकि, पुणे, अजमेर और अन्य स्थानों पर चल रहे मामलों से पता चलता है कि ‘जॉली एलएलबी 3’ को लेकर कानूनी विवाद अभी खत्म नहीं हुए हैं। यह फ्रैंचाइज़ी अपने हास्य और सामाजिक टिप्पणियों के लिए जानी जाती है, लेकिन इसके चित्रण को कुछ वर्गों द्वारा संवेदनशील माना जा रहा है। इससे फिल्म निर्माताओं के लिए यह चुनौती बढ़ती है कि वे हास्य और सामाजिक संदेशों के बीच संतुलन बनाएं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ‘जॉली एलएलबी 3’ और इसके गाने ‘भाई वकील है’ को आपत्तिजनक न पाते हुए याचिका को खारिज कर दिया, जिससे फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो गया। कोर्ट ने ट्रेलर और गाने की सामग्री की समीक्षा के बाद स्पष्ट किया कि इसमें कुछ भी ऐसा नहीं है जो वकालत पेशे या न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाए। हालांकि, पुणे और अन्य स्थानों पर चल रहे मामले इस बात का संकेत हैं कि फिल्म को लेकर विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इस मामले पर अधिक जानकारी के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय समाचार स्रोतों की जांच करें।(शालू पांडे, अधिवक्ता, विधि संपादक एसएसएन)

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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