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“टॉरपीडो, स्मार्ट एम्मो और बंदूकों पर राजनाथ सिंह का विज़न”

 

आज का सारांश: “टॉरपीडो, स्मार्ट एम्मो और बंदूकों पर राजनाथ सिंह का विज़न”

1. दीर्घ युद्धों के लिए ‘सर्ज़ क्षमता’ बढ़ाने का संदेश

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि भविष्य की युद्ध स्थितियाँ अप्रत्याशित और दीर्घकालीन हो सकती हैं—दो महीने से लेकर पाँच साल तक—इसलिए हमें अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता (surge capacity) को मजबूत बनाना होगा। इस दृष्टिकोण में युद्ध के दौरान आवश्यक टॉरपीडो, आधुनिक गोला-बारूद (smart ammo) और बंदूकें व छोटे हथियार समयबद्ध रूप से उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है।

2. प्रौद्योगिकी, रणनीति और अनुकूलनशीलता का त्रिकोण

उन्होंने “तकनीक, रणनीति और अनुकूलन क्षमता” की त्रुटि-शक्ति (triangle) को युद्ध के भविष्य की सफलता की कुंजी बताया। इसका अर्थ यह है कि हथियार और गोला-बारूद आधुनिक तकनीकी मानकों को पूरा करें, रणनीतिक रूप से उपयोगी हों, और बदलते अपेक्षाओं के अनुरूप ढल सकें।

3. स्मार्ट एम्मो पर प्रतिक्रिया

हालांकि आज सीधे तौर पर स्मार्ट गोला-बारूद (smart ammo) को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई, परंतु स्पष्टीकरण से यह संकेत मिलता है कि DAC की बैठक में प्रणालीगत और निर्देशात्मक गाइडेंस प्रदान करने वाले अत्याधुनिक गोला-बारूद—जैसे कि स्मार्ट एम्मो—की दिशा में कदम बढ़ाना शामिल हो सकता है।

4. टॉरपीडो और लंबी दूरी का मुकाबला साधन

पिछले वर्षों में DRDO ने SMART (Supersonic Missile-Assisted Release of Torpedo) प्रणाली का सफल परीक्षण कर चोरी से आगे बढ़कर लंबी दूरी से टॉरपीडो लॉन्च करने की क्षमता प्राप्त की है। यह संभावना है कि DAC में ऐसी प्रणालियों को अपनाने और आगे के विकास पर चर्चा हो सकती है।

5. बंदूकों और छोटे हथियारों की भूमिका

डिफेंस इंडस्ट्री में आत्मनिर्भरता और भारत को हथियार निर्यातक बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। छोटे हथियारों की श्रृंखलाओं—बंदूकों, राइफलों—की उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता नियंत्रण और नवाचार को DAC में प्राथमिकता दी जा सकती है।रणनीतिक तैयारी: राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत को युद्ध की लंबाई की कोई भविष्यवाणी नहीं होती—इसलिए तैयार रहना आवश्यक है।

  • आधुनिक हथियार व्यवस्था: तकनीकी, रणनीतिक और अनुकूलनशील हथियारों की दिशा में चल रही योजनाएँ—जिसमें टॉरपीडो, स्मार्ट गोला-बारूद और बंदूकें शामिल हैं—DAC की अगली बैठक में चर्चा के मुख्य विषय हो सकते हैं।
  • आत्मनिर्भरता और निर्यात: भारत के रक्षा उद्योग को आत्मनिर्भर बनाकर ग्लोबल हथियार बाजार में प्रवेश दिलाने हेतु कदम उठाए जा रहे हैं।

 

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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