2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस की जांच में शामिल एक पूर्व ATS अधिकारी के सनसनीखेज खुलासे का विवरण है — जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया था। सनसनीखेज दावा: ATS अधिकारी ने कहा—“हमें मोहन भागवत को गिरफ्तार करने को कहा गया”
प्रमुख बिंदु:
- मालेगांव ब्लास्ट मामले में शामिल एक पूर्व महाराष्ट्र ATS निरीक्षक, मेहबूब मुजावर, ने दावा किया कि उन्हें तत्कालीन जांच अधिकारी परमबीर सिंह द्वारा निर्देशित किया गया था कि वे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करें ।
- मुजावर ने कहा कि यह आदेश “भगवा (सैफ्रन) आतंकवाद” की थ्योरी को गढ़ने के लिए था। उनका दावा है कि इससे नैतिक व कानूनी रूप से खतरनाक दिशा में जांच को मोड़ने की कोशिश हो रही थी ।
मुजावर का अनुभव: दबाव, विरोध और परिणाम
- मुजावर के अनुसार, जब उन्होंने इस आदेश का विरोध किया, तो उन पर झूठा केस दर्ज कर करियर को नुकसान पहुंचाया गया। बाद में वे उन आरोपों से बरी हो गए ।
- उन्होंने आरोप लगाया कि ATS ने मृतकों को जिंदा दिखाने वाले चार्जशीट दाखिल करने को कहा, जिसे उन्होंने अवैध समझकर अस्वीकार कर दिया ।
मामले का पृष्ठभूमि: ब्लास्ट से अदालती फैसले तक
- 29 सितंबर 2008 को मालेगांव के भीक्कू चौक में एक बाइक बम विस्फोट हुआ, जिसमें छह लोगों की मृत्यु और 101 अन्य घायल हुए ।
- जांच पहले ATS ने की, फिर 2011 में इसे NIA को सौंप दिया गया। NIA ने ATS की रिपोर्ट में भारी खामियाँ पाई ।
- 17 साल बाद, 31 जुलाई 2025 को विशेष NIA ट्रायल कोर्ट ने सभी 7 आरोपियों को निर्दोष करार दिया, जिसमें साध्वी प्रज्ञा और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित शामिल थे
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने हाइपोथेटिकल “सैफ्रन आतंकवाद” की थ्योरी को अस्वीकार करते हुए कहा कि यह राजनीतिक रूप से निर्मित थी और जांच को गलत दिशा में मोड़ने की कोशिश थी
- मामले से जुड़े आरोपी—विशेषकर सैद्ध्वी प्रज्ञा और पुरोहित—ने अपनी यात्रा, यातना और गलत आरोपों का जिक्र करते हुए न्याय की लंबी लड़ाई की बात की है
निष्कर्ष: जांच प्रक्रिया पर सवाल, राजनीतिक कुकर्म की छाया
पूर्व ATS अधिकारी मेहबूब मुजावर द्वारा किया गया यह खुलासा जांच प्रक्रिया में संभावित राजनीतिक दखल और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग की गंभीर आशंकाओं को बल देता है। अदालत के फैसले ने अंततः वह दिखा दिया कि आरोपों को साबित करने के लिए विश्वसनीय और निर्णायक सबूत नहीं थे।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है: क्या तटरहित जांच और वैधानिक प्रक्रिया बनी रही, या कहीं राजनीतिक उद्देश्य के अनुरूप जांच को मोड़ने का प्रयास हुआ?
घटनाक्रम की टाइमलाइन
| वर्ष/दिनांक | घटना |
|---|---|
| 29 सितंबर 2008 | मालेगांव में भीक्कू चौक पर बम विस्फोट |
| 2011 | केस NIA को सौंपा गया |
| 31 जुलाई 2025 | विशेष NIA कोर्ट ने सभी सात आरोपियों को निर्दोष करार दिया |
| 1 अगस्त 2025 | पूर्व ATS अधिकारी मेहबूब मुजावर ने “भागवत गिरफ्तारी” के आदेश का खुलासा किया |
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




