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स्टारलिंक को भारत में मिला लाइसेंस, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने की पुष्टि – बड़ा कदम डिजिटल कनेक्टिविटी की दिशा में

स्टारलिंक को भारत में मिला लाइसेंस, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने की पुष्टि – बड़ा कदम डिजिटल कनेक्टिविटी की दिशा में

नई दिल्ली, 1 अगस्त 2025 — भारत में इंटरनेट क्रांति की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) को देश में ब्रॉडबैंड सेवाएं देने का लाइसेंस प्रदान कर दिया है। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज इस बात की आधिकारिक पुष्टि की।

मंत्री सिंधिया ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा,

“भारत की डिजिटल क्रांति को तेज़ी से आगे ले जाने और दूरदराज़ के क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के लिए स्टारलिंक को ब्रॉडबैंड सेवा का लाइसेंस प्रदान किया गया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ मिशन को मजबूती देगा।”

क्या है स्टारलिंक?

स्टारलिंक, एलन मस्क की स्पेसएक्स (SpaceX) की एक उपकंपनी है, जो लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा प्रदान करती है। इस तकनीक के जरिए उन क्षेत्रों में भी ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध कराई जा सकती है, जहां अभी तक फाइबर या मोबाइल नेटवर्क पहुंच नहीं सका है।

लाइसेंस मिलने का महत्व:

  • अब स्टारलिंक भारत में व्यावसायिक रूप से इंटरनेट सेवा शुरू कर सकती है
  • ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के जरिए कनेक्टिविटी बढ़ेगी।
  • यह भारत के 5G और डिजिटल समावेशन लक्ष्यों को मजबूती देगा।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास को मिलेगा तकनीकी सहयोग

क्या कहना है स्टारलिंक का?

स्टारलिंक इंडिया के प्रमुख ने एक बयान में कहा:

“हम भारत सरकार और दूरसंचार विभाग के सहयोग के आभारी हैं। हमारा उद्देश्य भारत के हर कोने में तेज़, विश्वसनीय और किफायती इंटरनेट पहुंचाना है।”

पृष्ठभूमि:

स्टारलिंक ने पहले भी भारत में सेवा देने की कोशिश की थी, लेकिन सरकारी मंजूरी और रेगुलेटरी बाधाओं के चलते प्रक्रिया लंबी खिंच गई थी। अब, लाइसेंस मिलने के बाद स्टारलिंक जल्द ही भारत के चुनिंदा राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट्स के साथ शुरुआत करेगा।

आगे की राह:

  • शुरुआत में सेवा ग्रामीण क्षेत्रों और सीमावर्ती राज्यों में दी जाएगी।
  • उपभोक्ताओं को डिश टर्मिनल और सब्सक्रिप्शन मॉडल के तहत सेवा मिलेगी।
  • भारत में निर्माण इकाइयों की स्थापना पर भी विचार चल रहा है।

यह कदम भारत में डिजिटल खाई को पाटने और ग्लोबल इंटरनेट इनोवेशन में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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