1. राहुल गांधी (नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा)
- राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू तो किया, लेकिन सिर्फ 22 मिनट में नियंत्रण स्थापित कर पाक से शांति की माँग कर दी, जिससे इसे ‘आत्मसमर्पण’ जैसा बताया गया। उन्होंने तीखी टिप्पणी की कि “हमने लड़ाई शुरू की, फिर टूट‑सूट कर कहा हम escalation नहीं चाहेंगे”—इस निर्णय से सेना के पायलटों की “हाथ पीछे बांध दिए गए” हालत हुई।
- उन्होंने पूछा कि भारत ने पांच लड़ाकू विमान खो दिए, लेकिन किसकी गलती थी—सेना की या राजनैतिक निर्णय की? “विमान खो जाना राजनीतिक नेतृत्व की कमी है, सेना दोषी नहीं”।
- राहुल ने स्पष्ट किया कि जिस अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी ceasefire की तयारी को श्रेय लिया, उसपर पीएम मोदी को संसद में जवाब देना चाहिए।
2. गौरव गोगोई (कांग्रेस सांसद)
- उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से पूछा, “26 अप्रैल के पहलगाम हमले के 100 दिन बाद अभी तक यह नहीं बताया गया कि आतंकवादी कैसे पहलगाम पहुंचे?” इस लोकतांत्रिक सवाल पर कांग्रेस सांसदों का रोष था।
- गोगोई ने सरकार को ‘बुज़दिल सरकार’ कहा और कहा कि हम सैनिकों की क्षमता में संदेह नहीं करते, पर गवर्नमेंट की विफलता की भी समीक्षा होनी चाहिए।
3. प्रियंका गांधी वाड्रा
- प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि अगर जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली का दावा है, तो फिर पहलगाम हमला कैसे संभव हुआ? उन्होंने कहा कि सरकार बुद्धिजीविता से ध्यान भटकाने में लगी हुई है—जैसे नेहरू या मेरी माँ की बातें, जबकि असली सवाल जवाबदेही का है।
4. अखिलेश यादव (सपा सांसद)
- उन्होंने खुफिया विफलता को जिम्मेदार ठहराया और पूछा — क्या सेंसरिंग और पूर्व सूचना पर कोई तैयारी थी? उन्होंने इस आतंकी घटनाक्रम को जम्मू-कश्मीर में Article 370 हटाए जाने के प्रभाव में असंगत बताया।
5. असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM नेता)
- ओवैसी ने चिंता जताई कि भारत फिलहाल 42 अनुमोदित लड़ाकू विमानों में से केवल 29 परिचालन में हैं, जबकि चीन के पास 50 से अधिक हैं। उन्होंने सरकार से पूछा—क्या भविष्य में हथियारों की क्रय नीति में source code की पारदर्शिता होगी?
- उन्होंने कहा कि युद्ध पर क्रिकेट मैच कैसे न्यायोचित ठहराया जा सकता है: “मैं भारत-पाक मैच नहीं देखूँगा”, क्योंकि आतंकवाद पीड़ितों के परिवारों की भावनाओं का आदर होना चाहिए.
6. प्रणीति शिंदे (कांग्रेस सांसद, सोलापुर)
- उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को एक “तमाशा” बताया और पूछा कि आखिर इससे वास्तविक रूप से क्या मिला। उन्होंने सरकार से स्पष्ट आंकड़े, ऑपरेशन की उद्देश्य-प्राप्ति और सफलता की पुष्टि मांग की।
7. सुप्रिया सुले (NCP सांसद)
- सुले ने बीजेपी की आलोचना की कि विपक्ष को विदेश मिशन में शामिल करके उसे नेतृत्व दिखाने का तर्क देना विरोधाभाषपूर्ण है — “जब आपके पास विकल्प होता, हमें क्यों भेजना पड़ा?” उन्होंने कहा कि यह आरोप-प्रत्यारोप का खेल है और कर्तव्यों पर ध्यान देना चाहिए।
8. तेजस्वी सुर्य (BJP सांसद के जवाब में)
- अगर विरोधी नेता ने नेहरू के सैन्य नीतियों की आलोचना की, तो सुले ने उनका विरोध करते हुए इतिहास की व्याख्या की, जिससे विपक्षी दलों में गतिरोध स्पष्ट हुआ।
विपक्ष ने संसद में ऑपरेशन सिंदूर को स्थानीय सुरक्षा विफलताओं, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, सेना की स्वतंत्रता पर नियंत्रण, और सरकारी संचार रणनीति की कमजोरियों के दृष्टिकोण से गंभीरता से चुनौती दी। कांग्रेस, सपा, AIMIM जैसे दलों ने न केवल जवाबदेही की मांग की बल्कि सरकारी बयानबाजी में अस्पष्टता पर सवाल उठाए।
इस बहस में सवाल थे: हमले की रूपरेखा, रक्षा अनुशासन, विमानों की क्षति, ceasefire कब और क्यों माँगा गया, और क्या सरकार ने राष्ट्रीय हित से ज्यादा छवि बचाने को प्राथमिकता दी?
विपक्ष का कहना था कि सरकार को देश की सुरक्षा से खिलाड़ीछवि बचाने की राजनीति छोड़ कर पारदर्शी मूल्यांकन, गोपनीयता में कमी, और सत्यवादी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




