कल की संसद की चर्चा: एस. जयशंकर का भाषण (Operation Sindoor पर)
महत्त्वपूर्ण तिथियाँ:
- पाहलगाम आतंकी हमला: 22 अप्रैल 2025
- ऑपरेशन सिंदूर के निर्णय: 23 अप्रैल, तत्काल प्रभाव से लागू अभियानों की शुरुआत
- अमेरिका और ट्रम्प की कथित मध्यस्थता पर स्पष्टीकरण: “22 अप्रैल से 17 जून तक पीएम मोदी और ट्रम्प के बीच कोई फोन कॉल नहीं हुई”
प्रमुख बिंदु:
1. विदेश नीति और सैन्य प्रतिक्रिया – स्पष्ट संदेश
जयशंकर ने कहा कि प*[पाहलगाम()* आतंकवादी हमले के तुरंत बाद 23 अप्रैल 2025 को कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने निर्णय किया:
- सिंधु जल संधि स्थगित
- अटारी चेकपोस्ट बंद
- पाकिस्तानी उच्चायोग के काउंसलर वापस बुलाना आदि कार्यवाही शुरू
उन्होंने बताया कि ये कदम यह संदेश देने के लिए थे कि आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भारत की ‘रेड लाइन’ पार होती है तो परिणाम भी तय होंगे।
2. अंतरराष्ट्रीय समर्थन — भारत का पक्ष मजबूती से उभरा
- संयुक्त राष्ट्र की 193 सदस्य देशों में सिर्फ तीन राष्ट्रों ने ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया, जिससे वैश्विक समर्थन की स्पष्ट तस्वीर सामने आई।
- क्वाड और BRICS समूहों ने आतंकवाद की निंदा की और भारत के रुख का समर्थन किया।
- अमेरिका द्वारा ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित करना जयशंकर की प्रभावी कूटनीति का हिस्सा बताया गया।
3. दो प्रमुख मिथकों का खंडन
- ट्रंप के मध्यस्थता एवं व्यापार-सम्बंधित दावे: जयशंकर ने स्पष्ट किया कि अप्रैल 22 से जून 17 तक मोदी और ट्रंप के बीच कोई फोन कॉल नहीं हुई, और न ही व्यापार को लेकर कोई वार्ता हुई।
- Ceasefire पर अमेरिकी दबाव: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जयशंकर दोनों ने कहा कि पाकिस्तान ने ही लड़ाई बंद करने का प्रस्ताव रखा और भारत ने अपने रणनीतिक उद्देश्य पूरा करने बाद ही स्वीकार किया।
4. ऑपरेशन सिंदूर के पांच‑बिंदु रणनीति
जयशंकर ने बताया कि नई नीति में यह संदेश स्पष्ट है:
- आतंकवाद को प्रॉक्सी रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा
- सीमापार आतंकवाद का उचित जवाब
- आतंक और वार्ता साथ-साथ नहीं हो सकती
- परमाणु ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
- आतंक और अच्छे पड़ोस की भावना एक साथ नहीं रह सकती
“Terror and good neighbourliness cannot co‑exist; blood and water cannot flow together.”
5. विपक्ष और अमित शाह की प्रतिक्रिया
भाषण के दौरान विपक्ष ने कई बार जयशंकर का भाषण बाधित किया। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने दो बार हस्तक्षेप कर कहा कि विपक्ष विदेश की रिपोर्टों को ज्यादा महत्व देता है बजाय अपने मंत्री के वक्तव्य के। उन्होंने विपक्ष पर विश्वास की कमी का आरोप लगाया।
संपादक अजय पाण्डेय के कलम से निष्कर्ष-
विदेश मंत्री जयशंकर का भाषण ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में विदेश नीति और सैन्य रणनीति पर केंद्रित था। उन्होंने भारत की रक्षा‑नीति की स्पष्टता, सामरिक प्रतिस्पर्धा में निर्णायक कदम और उत्तरदाताओं के लिए नई ‘नॉर्मल’ बनाई। भाषण को प्रधानमंत्री मोदी ने “outstanding” बताया, जबकि विपक्ष के सवालों को गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ी भाषा में नकारा। कुल मिलाकर यह भाषण भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर भरोसा मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख स्थापित करने के उद्देश्य से दिया गया था। (PHOTO COURTESY LOKSABHA TV )
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




