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ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंचा, लेकिन इस्लामाबाद पर ‘पीठ में छुरा’ का शक गहराया

इस्लामाबाद, 11 अप्रैल 2026 — अमेरिका के साथ युद्धविराम और शांति वार्ता के लिए ईरान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार देर रात पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच गया। संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ के नेतृत्व में करीब 70-71 सदस्यों वाला यह दल विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को साथ लेकर आया। पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक दार, आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और अन्य उच्च अधिकारियों ने भव्य स्वागत किया।

लेकिन इस स्वागत के बावजूद ईरानी पक्ष में पाकिस्तानी व्यवहार को लेकर गहरा अविश्वास और संदेह व्याप्त है। ईरानी जनता और कुछ अधिकारी पाकिस्तान को “पीठ में छुरा घोंपने” (backstabbing) की पुरानी आदत वाला साथी मानते हैं।

वार्ता का मकसद और पृष्ठभूमि

पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम लागू हुआ है। इस वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। मुख्य मुद्दे हैं — स्थायी ceasefire, स्ट्रीट ऑफ हरमुज खोलना, ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम पर रोक, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स (जैसे हिजबुल्लाह) पर नियंत्रण। ईरान ने अपनी 10-पॉइंट प्रस्ताव रखा है, लेकिन इजरायल के लेबनान पर हमलों को लेकर तनाव जारी है।

पाकिस्तान खुद को “मेक-ऑर-ब्रेक” वार्ता का मेजबान बता रहा है, लेकिन ईरान की ओर से साफ संदेश है — शर्तें पूरी न हुईं तो बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।

ईरानी संदेह: पाकिस्तान पर ‘बैकबाइटिंग’ का आरोप

ईरानी पक्ष में पाकिस्तान के व्यवहार को लेकर गहरा असुरक्षा का माहौल है। कारण:

  • ऐतिहासिक विश्वासघात: ईरान-पाकिस्तान संबंधों में गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दों पर कई बार पाकिस्तान को दोहरा खेल खेलने का आरोप लगता रहा है। ईरानी जनमत में पाकिस्तान को “अमेरिका की तरफ झुकाव” वाला देश माना जाता है।
  • हालिया घटनाएं: कुछ सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने अमेरिका को ईरान की गुप्त जानकारी देने या तेल टैंकरों से जुड़े मामलों में “बैकस्टैब” किया। हालाँकि पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है, लेकिन ईरानी राजदूत द्वारा पोस्ट डिलीट करने जैसी घटनाएं संदेह बढ़ा रही हैं।
  • वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका: पाकिस्तान अमेरिका और ईरान दोनों से करीबी रखता है — एक तरफ चीन-ईरान से संबंध, दूसरी तरफ अमेरिका और सऊदी अरब से आर्थिक और सैन्य सहयोग। ईरान इसे “दोहरी नीति” मान रहा है।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने आते समय मीनाब में मारे गए बच्चों की तस्वीरें, बैग और जूते साथ लाकर अपनी पीड़ा जताई। यह संकेत दे रहा है कि ईरान युद्ध के घाव भुलाने को तैयार नहीं है और किसी भी “पीठ में छुरा” को बर्दाश्त नहीं करेगा।

पाकिस्तान की चुनौती

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने वार्ता को “मेक-ऑर-ब्रेक” बताया है। अगर वार्ता सफल हुई तो पाकिस्तान को बड़ा कूटनीतिक लाभ मिल सकता है। लेकिन अगर ईरान को लगा कि पाकिस्तान अमेरिका की तरफ झुका हुआ है, तो न सिर्फ यह वार्ता फेल हो सकती है बल्कि ईरान-पाकिस्तान संबंध और खराब हो सकते हैं।

आगे क्या?

शनिवार को अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के बीच औपचारिक बातचीत शुरू होगी। दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हैं। अगर स्थायी शांति का रास्ता निकला तो मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है, वरना हरमुज स्ट्रेट बंद रहने से वैश्विक तेल संकट गहरा सकता है।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल स्पष्ट है — दोस्ती का दिखावा ठीक है, लेकिन पीठ में छुरा चलाने की कोई गुंजाइश नहीं। पाकिस्तान को अब साबित करना होगा कि वह वास्तविक मध्यस्थ है, न कि कोई दोहरा खेल खेलने वाला खिलाड़ी।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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