ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के महज 5 दिन में ही अमेरिकी सेना के गोला-बारूद और मिसाइलों का भंडार तेजी से खाली हो गया है। इसी संकट के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने आज बड़ी कार्रवाई की है। व्हाइट हाउस ने लॉकहीड मार्टिन, RTX (रेथियॉन टेक्नोलॉजीज), बोइंग, नॉर्थरोप ग्रुम्मन और जनरल डायनेमिक्स समेत देश की सभी प्रमुख रक्षा कंपनियों के CEO को शुक्रवार (6 मार्च) को व्हाइट हाउस में विशेष बैठक के लिए बुलाया है।
Reuters की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक का एकमात्र एजेंडा है — हथियार उत्पादन को तुरंत तेज करना और ईरान पर किए गए हमलों (2000+ बम और सैकड़ों मिसाइलें) से जो स्टॉक खाली हुआ है, उसे दोबारा भरना।
बैठक में क्या होगा?
- पेंटागन 50 अरब डॉलर के सप्लीमेंटल बजट की मांग तैयार कर रहा है।
- टॉमहॉक मिसाइल, Javelin, HIMARS रॉकेट, F-35 लड़ाकू विमान पार्ट्स और ड्रोन उत्पादन को कई गुना बढ़ाने के टारगेट तय किए जाएंगे।
- ट्रंप के जनवरी के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत कंपनियों को चेतावनी — स्टॉक बायबैक और डिविडेंड पर रोक, अगर उत्पादन नहीं बढ़ाया तो एग्जीक्यूटिव सैलरी भी कैप होगी।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान पर 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों में अमेरिका और इजराइल ने इतनी मिसाइलें और बम खर्च कर दिए कि स्टॉक 30-40% तक कम हो गया है। अब पेंटागन को तुरंत री-प्लेनिशमेंट चाहिए।
ट्रंप ने हाल ही में Truth Social पर लिखा था — “हमारी सेना के पास दुनिया का सबसे बेहतरीन हथियार है, लेकिन हमें और तेजी चाहिए। हम ‘फॉरएवर’ लड़ सकते हैं, लेकिन कंपनियों को प्लांट और प्रोडक्शन बढ़ाना होगा!”
कंपनियों पर दबाव
- RTX (रेथियॉन): टॉमहॉक मिसाइलों का उत्पादन 2026 में 1000 यूनिट सालाना करने का नया कॉन्ट्रैक्ट पहले ही मिल चुका है, लेकिन अब और तेजी मांगी जाएगी।
- लॉकहीड मार्टिन: Javelin और HIMARS सिस्टम की डिमांड अचानक बढ़ गई है।
- बोइंग और नॉर्थरोप ग्रुम्मन भी बड़े ऑर्डर की तैयारी में हैं।
व्हाइट हाउस के सूत्रों ने बताया कि डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी स्टीव फाइनबर्ग इस पूरे अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। बैठक के बाद 50 अरब डॉलर का अतिरिक्त बजट आज या कल जारी हो सकता है।
यह बैठक ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट आर्म्स ट्रांसफर स्ट्रैटजी’ का हिस्सा है, जिसमें विदेशों को हथियार बेचने के साथ-साथ अमेरिकी स्टॉक को मजबूत रखना भी शामिल है।
भारतीय नजरिए से महत्व: मध्य पूर्व में फंसे लाखों भारतीयों की सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति इस युद्ध पर निर्भर करती है। अगर अमेरिका अपना स्टॉक जल्दी नहीं भरा तो युद्ध और लंबा खिंच सकता है, जिसका असर तेल कीमतों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान अभी नहीं आया है, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि ट्रंप खुद बैठक की अध्यक्षता कर सकते हैं।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




