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एनसीएलटी के नए अध्यक्ष नियुक्त: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल

नई दिल्ली, 30 अप्रैल 2026 — केंद्र सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल (Justice Anupinder Singh Grewal) को राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 29 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के माध्यम से की गई है।

नियुक्ति की शर्तें स्पष्ट हैं — न्यायमूर्ति ग्रेवाल को पाँच वर्ष की अवधि के लिए या 67 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक (जो भी पहले हो) के लिए NCLT का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्हें पूर्व-संशोधित वेतनमान के अनुसार 80,000 रुपये (निश्चित) का वेतन मिलेगा। वे पूर्व NCLT अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रामलिंगम सुधाकर का स्थान लेंगे, जिन्होंने नवंबर 2021 से सेवा की थी।

न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल का संक्षिप्त परिचय

न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल का जन्म 10 मार्च 1964 को पंजाब के लुधियाना जिले में एक कृषक परिवार में हुआ था। उनके पिता पंजाब लोक निर्माण विभाग (बी एंड आर) में मुख्य अभियंता के पद से 1981 में सेवानिवृत्त हुए थे।

  • वकालत की शुरुआत: उन्होंने 1992 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की।
  • सरकारी वकील के रूप में: 1995 से 2014 तक वे पंजाब सरकार के एडवोकेट जनरल ऑफिस से जुड़े रहे। उन्होंने सहायक एडवोकेट जनरल, डिप्टी एडवोकेट जनरल और अंत में अतिरिक्त एडवोकेट जनरल के रूप में सेवा की।
  • न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति: 25 सितंबर 2014 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। बाद में उन्हें राजस्थान उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया, जहाँ 20 मई 2016 को स्थायी न्यायाधीश बने। अंततः अक्टूबर 2016 में वे वापस पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में आ गए।
  • सेवानिवृत्ति: मार्च 2026 में उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से सेवा निवृत्ति ली। उनकी न्यायिक सेवा 11 वर्ष से अधिक की रही।

न्यायमूर्ति ग्रेवाल को स्वतंत्र विचारों, संतुलित दृष्टिकोण और सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता के लिए जाना जाता है। उन्होंने पुलिस जवाबदेही, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक निष्पक्षता से संबंधित कई महत्वपूर्ण फैसले दिए। वे एक उत्साही गोल्फर भी हैं और राष्ट्रीय स्तर पर पंजाब का क्रिकेट टीम के लिए प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

NCLT का महत्व और नई नियुक्ति का संदर्भ

राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) कॉर्पोरेट मामलों का प्रमुख न्यायिक मंच है। यह कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत इंसॉल्वेंसी और दिवाला संहिता (IBC) के अंतर्गत कंपनी मामलों, विलय, पुनर्गठन, शेयरधारकों के विवादों और दिवालिया प्रक्रियाओं का निपटारा करता है। NCLT के फैसले भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट क्षेत्र पर सीधा प्रभाव डालते हैं।

इस पद पर आमतौर पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीशों को नियुक्त किया जाता है। न्यायमूर्ति ग्रेवाल की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली उच्च न्यायालय में NCLT के कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी। केंद्र की इस नियुक्ति के बाद याचिका निरर्थक  हो गई और अदालत ने इसे बंद कर दिया।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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