Saryu Sandhya News

एमएलसी चुनाव कर्टन राइज़र-टीम एसएसएन एक्सक्लूसिव

भारत के लोकतान्त्रिक ढाँचे में, राष्ट्रीय स्तर पर संसद द्विसदनीय (लोकसभा और राज्यसभा) है। राज्य स्तर पर, राज्यों के पास यह विकल्प होता है कि वे एकसदनीय प्रणाली (केवल विधानसभा) अपनाएँ या द्विसदनीय प्रणाली (विधानसभा और विधान परिषद दोनों)।

विधान परिषद सदस्य (MLC) राज्य के उच्च सदन (विधान परिषद) में सेवा देते हैं। विधानसभा सदस्यों (MLA) के विपरीत, जिनका चुनाव जनता सीधे मतदान द्वारा करती है, MLCs का चुनाव एक विशेष, अप्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। इसका उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।

 किन राज्यों में विधान परिषद है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 169 के तहत, यदि किसी राज्य की विधानसभा विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करती है, तो संसद उस राज्य में विधान परिषद का गठन या उसे समाप्त कर सकती है।

वर्तमान में भारत के 28 में से केवल 6 राज्यों में द्विसदनीय विधायिका (विधान परिषद) सक्रिय है:

  1. उत्तर प्रदेश

  2. बिहार

  3. महाराष्ट्र

  4. कर्नाटक

  5. आंध्र प्रदेश

  6. तेलंगाना

सदस्य संख्या का नियम: संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार, किसी विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों के एक-तिहाई (1/3) से अधिक नहीं हो सकती, और किसी भी स्थिति में 40 से कम नहीं होनी चाहिए।

 MLC चुनाव प्रक्रिया: सीटों का आवंटन

अनुच्छेद 171 के तहत, विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव और मनोनयन पाँच अलग-अलग श्रेणियों (निर्वाचक मंडलों) के माध्यम से होता है:

                      ┌─────────────────────────────────────────┐
                      │      विधान परिषद की संरचना और गठन     │
                      └────────────────────┬────────────────────┘
                                           │
         ┌──────────────────┬──────────────┼──────────────┬──────────────────┐
         ▼                  ▼              ▼              ▼                  ▼
      1/3 भाग             1/3 भाग        1/12 भाग       1/12 भाग           1/6 भाग
     विधायकों           स्थानीय निकायों    स्नातक         शिक्षक           राज्यपाल द्वारा
  (MLAs) द्वारा          के प्रतिनिधियों  क्षेत्र से     क्षेत्र से           मनोनीत
                           द्वारा
निर्वाचक मंडल (Electoral College) सीटों का हिस्सा मतदाता / चुनाव प्रक्रिया
विधानसभा सदस्य (MLAs) 1/3 हिस्सा ($\approx 33.3\%$) राज्य के विधायकों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत (STV) प्रणाली द्वारा चुने जाते हैं।
स्थानीय निकाय (Local Bodies) 1/3 हिस्सा ($\approx 33.3\%$) नगर निगम, नगरपालिका, जिला पंचायत और ब्लॉक/क्षेत्र पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा चुने जाते हैं।
स्नातक क्षेत्र (Graduates’ Constituencies) 1/12 हिस्सा ($\approx 8.3\%$) राज्य के उन नागरिकों द्वारा चुने जाते हैं, जिनके पास कम से कम 3 साल पहले से विश्वविद्यालय की स्नातक डिग्री हो।
शिक्षक क्षेत्र (Teachers’ Constituencies) 1/12 हिस्सा ($\approx 8.3\%$) राज्य के उन शिक्षकों द्वारा चुने जाते हैं, जो कम से कम 3 वर्षों से माध्यमिक स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहे हों।
राज्यपाल द्वारा मनोनयन 1/6 हिस्सा ($\approx 16.7\%$) मंत्रिमंडल की सलाह पर राज्यपाल द्वारा सीधे मनोनीत किए जाते हैं। ये व्यक्ति साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन या समाज सेवा के क्षेत्र से होने चाहिए।

 योग्यता और कार्यकाल

पात्रता मानदंड (Eligibility)

विधान परिषद चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार को:

  • भारत का नागरिक होना अनिवार्य है।

  • आयु कम से कम 30 वर्ष होनी चाहिए (विधायक/MLA के लिए 25 वर्ष है)।

  • राज्य के किसी विधान परिषद क्षेत्र का पंजीकृत मतदाता होना चाहिए।

  • केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए।

संरचना और कार्यकाल

  • स्थाई सदन (Permanent Body): विधानसभा की तरह विधान परिषद कभी भंग नहीं होती।

  • 6 वर्ष का कार्यकाल: प्रत्येक MLC का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है।

  • निरंतरता: इसके एक-तिहाई (1/3) सदस्य हर 2 साल में सेवानिवृत्त होते हैं, जिससे यह सदन राज्यसभा की तरह लगातार कार्य करता रहता है।

 मतदान प्रणाली

MLC चुनाव भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की देखरेख में आयोजित किए जाते हैं।

  1. गुप्त मतदान और STV: विधायकों, स्थानीय निकायों, स्नातकों और शिक्षकों के लिए मतदान आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote) द्वारा गुप्त मतदान के ज़रिए होता है।

  2. मतदाता पंजीकरण फार्म:

    • फार्म 18: स्नातक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए।

    • फार्म 19: शिक्षक क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए।

 विधान परिषद की शक्तियाँ और भूमिका

विधान परिषद एक समीक्षात्मक सदन के रूप में कार्य करती है, लेकिन इसकी शक्तियां विधानसभा (Vidhan Sabha) की तुलना में सीमित हैं:

  • साधारण विधेयक: विधान परिषद किसी साधारण विधेयक को पहली बार में 3 महीने और दूसरी बार में 1 महीने (कुल मिलाकर अधिकतम 4 महीने) के लिए रोक सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह खारिज नहीं कर सकती।

  • धन विधेयक (Money Bill): धन विधेयक केवल विधानसभा में ही पेश किया जा सकता है। विधान परिषद इसे केवल 14 दिनों तक रोक सकती है; इसके बाद इसे स्वतः पारित मान लिया जाता है।

  • सरकार पर नियंत्रण: राज्य मंत्रिपरिषद केवल विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। अविश्वास प्रस्ताव केवल विधानसभा में लाया जा सकता है, विधान परिषद में नहीं।

saryusandhyanews
Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

Spread the love