सुल्तानपुर/नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने वर्ष 2018 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणी से जुड़े बहुचर्चित मानहानि मामले (Defamation Case) में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बरी कर दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) शुभम वर्मा की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने शिकायत को प्रथम दृष्टया संदिग्ध और राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया है।
मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की अदालत की मुख्य टिप्पणियां
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने अपने फैसले में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु रखे:
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शिकायत को बताया संदिग्ध: अदालत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके पदाधिकारियों को बदनाम करने के आरोप वाली यह आपराधिक शिकायत प्रथम दृष्टया (Prima Facie) संदिग्ध, अस्वाभाविक और पुष्टियों से रहित थी।
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राजनीतिक या अन्य कारणों से प्रेरित: जज ने टिप्पणी की कि यह शिकायत प्रतीत होता है कि केवल “किसी भी तरह से शिकायत दर्ज कराने” के उद्देश्य से दाखिल की गई थी और यह राजनीतिक या अन्य विचारों से प्रेरित थी।
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बयान मानहानि की श्रेणी में नहीं: अदालत ने माना कि राहुल गांधी के वे बयान मानहानि के दायरे में नहीं आते हैं और शिकायतकर्ता इस मामले में सीधे तौर पर पीड़ित व्यक्ति (Aggrieved Person) नहीं बनता है।
क्या था पूरा मामला?
वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान बेंगलुरु में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने बयान दिया था:
“भारत में लोग भूल जाते हैं कि भाजपा के अध्यक्ष एक हत्या के आरोपी हैं। यही सच है। जो पार्टी ईमानदारी और सदाचार की बात करती है, उसके अध्यक्ष पद पर एक ऐसा व्यक्ति है जिस पर हत्या का आरोप है।”
(उस समय अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। हालांकि, वर्ष 2014 में मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने अमित शाह को सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले से बरी कर दिया था।)
इस बयान के विरोध में साल 2018 में ही भाजपा नेता विनय मिश्रा ने सुल्तानपुर की अदालत में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 और 500 के तहत आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इस मामले की अंतिम बहस 12 अक्टूबर को पूरी हुई थी, जिसके बाद अदालत ने फैसले के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की थी।
अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे राहुल गांधी
फैसला सुनाए जाने के वक्त राहुल गांधी व्यक्तिगत रूप से सुल्तानपुर की जिला अदालत में मौजूद रहे। फैसले के बाद बचाव पक्ष के वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने मीडिया को जानकारी दी कि अदालत ने उनके तर्कों को स्वीकार करते हुए राहुल गांधी को सभी मानहानि के आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




