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भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान ने द्विपक्षीय संबंधों को “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर पर पहुंचाने के साथ-साथ दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति व्यवस्था पर सहमति बनाई। यह समझौता भारत की परमाणु ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

समझौते की मुख्य बातें

दोनों देशों के नेताओं—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव—के बीच ताशकंद के कुक्सरॉय प्रेसिडेंशियल पैलेस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई।

पीएम मोदी ने वार्ता के दौरान स्पष्ट रूप से कहा:

“हम यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए भी व्यवस्था स्थापित करेंगे।”

  • भारत पहले से ही 2019 के अनुबंध के तहत उज्बेकिस्तान से 1,100 मीट्रिक टन प्राकृतिक यूरेनियम का आयात कर रहा था, जिसकी अवधि 2026 में समाप्त हो रही थी।
  • नया दीर्घकालिक समझौता भारत के नागरिक परमाणु कार्यक्रम के लिए स्थिर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
  • उज्बेकिस्तान विश्व के शीर्ष पांच यूरेनियम उत्पादकों में शामिल है और इसके पास लगभग 1.39 लाख टन यूरेनियम भंडार है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

भारत अपने दबाव वाले भारी जल रिएक्टरों (PHWRs) को चलाने के लिए आयातित यूरेनियम (येलो केक) पर निर्भर है। घरेलू भंडार सीमित और निम्न गुणवत्ता वाले होने के कारण आयात आवश्यक है। वर्तमान में भारत कजाकिस्तान, रूस, कनाडा, फ्रांस और उज्बेकिस्तान से यूरेनियम मंगवाता है।

यह नया समझौता:

  • आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाएगा।
  • भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करेगा।
  • भारत के 2047 तक 100 गीगावॉट नागरिक परमाणु क्षमता के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा।

अन्य महत्वपूर्ण निर्णय

यूरेनियम समझौते के अलावा दोनों देशों ने कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले लिए:

  • द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान 1 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 5 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया।
  • संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर उन्नत किया गया (रणनीतिक साझेदारी के 15 वर्ष पूरे होने पर)।
  • खनन, महत्वपूर्ण खनिज, शिक्षा, संस्कृति, आयुर्वेद और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (जैसे यूपीआई) में सहयोग बढ़ाने पर सहमति।
  • तीन सिस्टर-सिटी और सिस्टर-स्टेट समझौतों को औपचारिक रूप दिया गया।
  • विदेश मंत्री स्तर पर समन्वय परिषद बनाने और संयुक्त आयोग को मंत्री स्तर पर उन्नत करने का फैसला।
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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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