श्रीनगर, 4 सितंबर 2026। प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख और तिहाड़ जेल में बंद यासीन मलिक ने 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट के अपहरण और हत्या के मामले में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। मलिक ने श्रीनगर की विशेष TADA/POTA अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में खुद को निर्दोष बताया।
25 पन्नों के हलफनामे में क्या कहा?
मलिक ने दावा किया कि उन्होंने सरला भट की हत्या का आदेश नहीं दिया और न ही उसमें किसी तरह भाग लिया। उनके अनुसार, उन्हें इस घटना के बारे में कथित तौर पर कई महीने बाद जानकारी मिली थी। उन्होंने यह भी कहा कि वह सरला भट का नाम पहली बार बाद में जान पाए।
SIA की चार्जशीट में मलिक का नाम
यह मामला उस समय फिर चर्चा में आया जब जम्मू-कश्मीर राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने जून 2026 में विशेष अदालत के समक्ष 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें यासीन मलिक और खुर्शीद अहमद चाकू को सरला भट हत्याकांड के कथित मुख्य साजिशकर्ताओं में नामित किया गया है।
सरला भट 27 वर्षीय कश्मीरी पंडित नर्स थीं, जो श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में कार्यरत थीं। अप्रैल 1990 में उनका अपहरण हुआ था और बाद में उनका शव बरामद किया गया था।
मुकदमा लड़ने से भी इनकार
मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ यह है कि मलिक ने आरोपों से इनकार करने के बावजूद अदालत में कहा है कि वह आगे ट्रायल को चुनौती नहीं देना चाहते। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अदालत से अपने लिए मृत्युदंड पर विचार करने का अनुरोध भी किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मुकदमा न लड़ने का फैसला अपराध स्वीकार करने के बराबर नहीं है।
सरला भट हत्याकांड 1990 के दशक की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हुई लक्षित हिंसा के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा है। दशकों बाद मामले की जांच दोबारा तेज होने से इस पुराने मामले में न्यायिक प्रक्रिया पर देशभर की नजर है। अभी अदालत को आरोपों, साक्ष्यों और बचाव पक्ष के रुख पर आगे निर्णय लेना है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST



