नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। अपने करीब 75 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देते हुए भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने आत्मनिर्भरता, युवा शक्ति, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा और तेज आर्थिक विकास को भारत की भविष्य की प्रगति के प्रमुख आधार बताया।
‘विकसित भारत@2047’ पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अब बड़े सपने देखने और उन्हें दृढ़ संकल्प के साथ पूरा करने की जरूरत है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को 2047 तक हासिल करने के लिए देशवासियों से सामूहिक प्रयास का आह्वान किया। उनके अनुसार आत्मनिर्भर भारत इस लक्ष्य की महत्वपूर्ण नींव है।
‘सप्तधारा’ से विकास की नई दिशा
प्रधानमंत्री ने विकास के लिए ‘सप्तधारा’ की अवधारणा सामने रखी। इसमें महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। सरकार का लक्ष्य महत्वपूर्ण तकनीकों और उत्पादन के क्षेत्रों में देश को अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।
युवा शक्ति को बनाया केंद्र
प्रधानमंत्री के भाषण में युवाओं की भूमिका प्रमुख रही। उन्होंने युवाओं को भारत के भविष्य का सबसे बड़ा आधार बताते हुए शिक्षा, कौशल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई संभावनाओं पर जोर दिया। भाषण में युवाओं का उल्लेख कई बार हुआ और अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने की बात सामने आई। गरीब और मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा भी प्रमुख बिंदुओं में रही।
सेमीकंडक्टर और परमाणु ऊर्जा पर बड़ा लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने तकनीकी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया। उन्होंने आने वाले वर्षों में देश में 5 से 8 सेमीकंडक्टर प्लांट और 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन की दिशा में लक्ष्य का उल्लेख किया। इससे भारत की रणनीतिक तकनीकी क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल का आह्वान
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और स्थानीय उत्पादन को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे कोच, खादी और अन्य क्षेत्रों में देश की बढ़ती उत्पादन क्षमता का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भरता को आर्थिक मजबूती से जोड़ा।
रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सख्त संदेश
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने नक्सल-माओवादी हिंसा के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का उल्लेख किया और वैचारिक रूप से हिंसा को बढ़ावा देने वाली ताकतों के प्रति सतर्क रहने की बात कही। भाषण में सुरक्षा के साथ-साथ नागरिकों की आपदा और संकट से निपटने की क्षमता मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
‘वंदे मातरम्’ से राष्ट्रभावना का संदेश
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ को विशेष महत्व दिया गया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र की एकता, देशभक्ति और सामूहिक संकल्प को भारत की विकास यात्रा से जोड़ा। 150 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में ‘वंदे मातरम्’ का उल्लेख भी भाषण के प्रमुख भावनात्मक पहलुओं में रहा।
ओलंपिक और खेलों में भारत की महत्वाकांक्षा
प्रधानमंत्री ने खेलों में भारत के बढ़ते प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत की महत्वाकांक्षा को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत को अनेक खेलों में अपनी भागीदारी और प्रदर्शन बढ़ाने की जरूरत है।
बाढ़ प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना
प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और संकट की घड़ी में सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। उन्होंने राष्ट्रीय एकजुटता और संकट के समय एक-दूसरे के साथ खड़े होने को भारत की ताकत बताया।
निष्कर्ष
लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज का संबोधन आत्मनिर्भर भारत, युवा शक्ति, तकनीकी क्षमता और विकसित भारत@2047 के व्यापक एजेंडे पर केंद्रित रहा। भाषण में आर्थिक विकास के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, AI, सेमीकंडक्टर, स्वदेशी उत्पादन और खेलों को भारत की अगली विकास यात्रा के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को केवल सरकार नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से हासिल किया जा सकता है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




