केंद्र सरकार ने सोमवार रात (10-11 अगस्त 2026) बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत 1993 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी दीप्ति गौड़ मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग की नई सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति शिक्षा मंत्रालय में हुए लगातार बदलावों के बीच आई है।
नियुक्ति का संदर्भ
दीप्ति गौड़ मुखर्जी इससे पहले कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत थीं। सरकार ने 23 जुलाई के अपने आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है। इससे पहले नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया था, लेकिन उनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी गई थी। वे विनीत जोशी की जगह लेंगी, जिन्हें पिछले महीने पंचायती राज मंत्रालय का सचिव बनाया गया था।
यह बदलाव एनईईटी-यूजी पेपर लीक विवाद और छात्र प्रदर्शनों के बाद शिक्षा मंत्रालय में हुए प्रशासनिक बदलावों का हिस्सा है। उच्च शिक्षा विभाग राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और विश्वविद्यालयों से जुड़े महत्वपूर्ण काम देखता है।
कौन हैं दीप्ति गौड़ मुखर्जी?
दीप्ति गौड़ मुखर्जी का जन्म 3 फरवरी 1969 को उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे 1993 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि मजबूत है:
- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से अर्थशास्त्र में एमए
- लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पब्लिक मैनेजमेंट एंड गवर्नेंस में एमएससी
- हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा
प्रशासनिक करियर
मध्य प्रदेश में उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग और स्टेट एजुकेशन मिशन में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। केंद्र में वे राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहीं और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में भी कार्यरत रहीं। अगस्त 2024 से वे कॉरपोरेट मामलों की सचिव थीं, जहां उन्होंने कॉरपोरेट गवर्नेंस और कंपनी कानून से जुड़े मामलों को संभाला।
नई जिम्मेदारियां
उच्च शिक्षा सचिव के रूप में दीप्ति गौड़ मुखर्जी विश्वविद्यालयों, तकनीकी शिक्षा संस्थानों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के क्रियान्वयन और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मामलों की निगरानी करेंगी। एनईईटी जैसे बड़े परीक्षा विवादों के बाद विभाग में विश्वास बहाली और सुधारों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




