संसद के मानसून सत्र में दो बड़े मुद्दे चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। एक तरफ गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया, तो दूसरी तरफ विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था पर हमला बोल रहे हैं।
अमित शाह का जन्म प्रमाण पत्र बिल क्या है?
29 जुलाई 2026 को लोकसभा में Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 पेश किया गया। यह बिल गृह मंत्री अमित शाह के नाम पर आया, हालांकि इसे गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में पेश किया।
बिल के मुख्य प्रावधान:
- देरी से पंजीकरण अब और सख्त:
- 1 साल से 2 साल की देरी पर जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी।
- 2 साल से ज्यादा देरी पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य।
- जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल बनाने पर जोर।
- डेटाबेस को आधार, वोटर लिस्ट, राशन कार्ड और पासपोर्ट से जोड़ने का प्रावधान।
- फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों पर रोक लगाने का दावा।
सरकार का कहना है कि इससे समय पर पंजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और फर्जीवाड़ा रुकेगा। आलोचक इसे आम लोगों के लिए जटिल बनाने वाला बता रहे हैं, खासकर ग्रामीण और गरीब वर्ग के लिए।
राहुल गांधी का पूरा फोकस NEET पर
इसी सत्र में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार NEET पेपर लीक और छात्र आंदोलन पर सरकार को घेर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि:
- पिछले 10 साल में 152 पेपर लीक हुए, लेकिन शून्य दोषसिद्धि हुई।
- शिक्षा व्यवस्था “रिग्ड” (जालसाजी वाली) हो गई है।
- छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है, सरकार सिर्फ कानून लाकर अपना बचाव कर रही है।
- एंटी-पेपर लीक बिल लाकर सरकार छात्रों के गुस्से को ठंडा करने की कोशिश कर रही है।
राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई है और कहा है कि फोकस छात्रों की समस्या पर होना चाहिए, न कि सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर।
संसद में जब अमित शाह का जन्म-मृत्यु बिल पेश हो रहा था, उसी समय विपक्ष NEET और जंतर-मंतर प्रदर्शन पर पीएम मोदी और गृह मंत्री की मौजूदगी की मांग कर रहा था। विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए अन्य बिल ला रही है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST



