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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तीन यूरोपीय देशों की ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर भारत लौटीं

नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने मोल्दोवा, उत्तर मैसिडोनिया और रोमानिया की अपनी तीन देशों की राजकीय यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर शनिवार (25 जुलाई 2026) को दिल्ली के लिए प्रस्थान किया। यह यात्रा 19 से 25 जुलाई 2026 तक चली, जिसमें व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, शिक्षा, रक्षा और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

यह यात्रा भारत के पूर्वी यूरोप के साथ संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली मानी जा रही है। मोल्दोवा और उत्तर मैसिडोनिया की यात्रा किसी भारतीय राष्ट्रपति की पहली यात्रा थी, जबकि रोमानिया की यात्रा तीन दशकों से अधिक समय बाद हुई।

यात्रा का विवरण

मोल्दोवा (20 जुलाई): राष्ट्रपति मुर्मू की यह पहली राज्य यात्रा थी। उन्होंने राष्ट्रपति माया सैंडू से द्विपक्षीय वार्ता की। कृषि, स्वास्थ्य-फार्मास्युटिकल्स, आईटी, नवीकरणीय ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। भारत ने आईटीईसी प्रशिक्षण स्लॉट दोगुने करने का फैसला लिया। प्रवासी भारतीयों से मुलाकात और बिजनेस फोरम भी आयोजित हुआ।

उत्तर मैसिडोनिया (21-22 जुलाई): यहां भी यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की पहली यात्रा थी। राष्ट्रपति गोर्दाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा और प्रधानमंत्री ह्रिस्टिजन मिकोस्की से वार्ता हुई। कृषि, फार्मा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और आईटी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। संसद को संबोधित किया गया और भारतीय समुदाय से मुलाकात की गई।

रोमानिया (23-25 जुलाई): तीन दशकों बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति की यह पहली यात्रा थी। राष्ट्रपति निकुसोर डैन से विस्तृत वार्ता में अगले तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य तय किया गया। रक्षा सहयोग, फार्मास्युटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, कृषि और एआई जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। तीन समझौता ज्ञापन (एमओयू) विज्ञान-प्रौद्योगिकी, खेल और बुखारेस्ट विश्वविद्यालय में भारतीय अध्ययन चेयर स्थापित करने पर हस्ताक्षर हुए। राष्ट्रपति मुर्मू को बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने ‘डॉक्टर होनोरिस कॉसा’ की उपाधि से सम्मानित किया। संसद का दौरा, बिजनेस फोरम और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात भी हुई। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लाभों पर भी चर्चा हुई।

यात्रा का महत्व

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा भारत की यूरोप और विशेष रूप से पूर्वी यूरोप के साथ साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। तीनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख का समर्थन किया। “3टी” (ट्रेड, टेक्नोलॉजी और टूरिज्म) पर फोकस रहा। प्रवासी भारतीयों को सांस्कृतिक राजदूत बताते हुए राष्ट्रपति ने उनके योगदान की सराहना की।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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