नई दिल्ली। NEET परीक्षा और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर कथित तौर पर गलत, भ्रामक और अपुष्ट सूचनाएं प्रसारित किए जाने के मामले में करीब 120 सोशल मीडिया हैंडल जांच के दायरे में आ गए हैं। अधिकारियों की ओर से ऐसे पोस्ट और अकाउंट्स की निगरानी की जा रही है, जिन पर परीक्षा में कथित पेपर लीक और विरोध प्रदर्शन से संबंधित अपुष्ट दावे फैलाने का आरोप है।
रिपोर्टों के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो, पोस्ट और संदेशों में NEET परीक्षा से जुड़ी ऐसी सूचनाएं साझा की गईं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। कुछ मामलों में पुराने वीडियो और तस्वीरों को नए घटनाक्रम से जोड़कर प्रस्तुत किए जाने की बात भी सामने आई। इससे छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम और चिंता बढ़ने की आशंका जताई गई।
प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी वायरल खबर या पोस्ट पर विश्वास करने से पहले उसकी पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से करें। परीक्षा से जुड़ी सूचनाओं के लिए NTA और शिक्षा मंत्रालय की आधिकारिक घोषणाओं को प्राथमिक स्रोत माना जाना चाहिए।
इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गलत सूचना के प्रसार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा और छात्र आंदोलनों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अफवाहें तेजी से फैल सकती हैं और उनका सीधा असर लाखों छात्रों के मानसिक तनाव तथा सार्वजनिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
प्रशासन की निगरानी के बीच यह बहस भी तेज हो गई है कि गलत सूचना पर कार्रवाई और नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य वैध आलोचना या शांतिपूर्ण विरोध को रोकना नहीं, बल्कि जानबूझकर फैलाई जा रही झूठी और भ्रामक सूचनाओं की पहचान करना है।
NEET विवाद के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल दावों की स्वतंत्र पुष्टि करना अब छात्रों और आम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण हो गया है। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी अपुष्ट पोस्ट को आगे साझा करने से पहले उसके स्रोत, तारीख और आधिकारिक पुष्टि की जांच जरूर की जाए।
समाचार विश्लेषण | NewsAsia.in
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST



