प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2026 में इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की तीन देशों की महत्वपूर्ण यात्रा पूरी की। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, रक्षा सहयोग, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और प्रवासी भारतीयों के साथ संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना रहा। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह दौरा भारत की वैश्विक कूटनीति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इंडोनेशिया: रणनीतिक साझेदारी को मिली नई गति
तीन देशों की यात्रा का पहला पड़ाव इंडोनेशिया रहा, जहां प्रधानमंत्री मोदी का राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने औपचारिक स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच व्यापक वार्ता में समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, खाद्य सुरक्षा और ब्लू इकॉनमी जैसे विषय प्रमुख रहे।
भारत और इंडोनेशिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्वतंत्र नौवहन और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के समर्थन पर भी जोर दिया। दोनों देशों ने आपसी व्यापार बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की।
ऑस्ट्रेलिया: व्यापार, रक्षा और शिक्षा पर विशेष जोर
दौरे का दूसरा चरण ऑस्ट्रेलिया में रहा, जहां प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के बीच तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ।
बैठक में निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई—
- रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा
- महत्वपूर्ण खनिज
- स्वच्छ ऊर्जा
- शिक्षा एवं कौशल विकास
- व्यापार और निवेश
- सेमीकंडक्टर एवं नई प्रौद्योगिकी
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को भी संबोधित किया और दोनों देशों के उद्योग जगत से निवेश बढ़ाने का आह्वान किया। मेलबर्न में भारतीय समुदाय द्वारा आयोजित विशाल कार्यक्रम में हजारों प्रवासी भारतीयों ने उनका भव्य स्वागत किया, जिसने भारत और ऑस्ट्रेलिया के लोगों के बीच मजबूत संबंधों को भी प्रदर्शित किया।
न्यूज़ीलैंड: नई संभावनाओं का अध्याय
तीसरे चरण में प्रधानमंत्री मोदी न्यूज़ीलैंड पहुंचे, जहां दोनों देशों के बीच व्यापार, कृषि, शिक्षा, पर्यटन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने, लोगों के बीच संपर्क मजबूत करने तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, भारतीय समुदाय के योगदान की भी सराहना की गई।
प्रवासी भारतीयों से संवाद
इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू तीनों देशों में बसे भारतीय समुदाय से प्रधानमंत्री मोदी का संवाद रहा। उन्होंने भारतीय मूल के लोगों को भारत का सांस्कृतिक दूत बताते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ा रही हैं। विशेष रूप से मेलबर्न में आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों की उपस्थिति ने इस दौरे को विशेष बना दिया।
यात्रा की प्रमुख उपलब्धियां
- भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को नई मजबूती।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग का विस्तार।
- व्यापार और निवेश बढ़ाने पर सहमति।
- रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा सहयोग को नई दिशा।
- शिक्षा, तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों में साझेदारी पर जोर।
- प्रवासी भारतीयों के साथ भारत के संबंध और मजबूत हुए।
एसएसएन टीम विश्लेषण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की यह तीन देशों की यात्रा भारत की सक्रिय विदेश नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस दौरे ने न केवल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को सुदृढ़ किया, बल्कि व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और जन-से-जन संबंधों को भी नई दिशा प्रदान की। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के परिणाम आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक और सामरिक स्थिति को और अधिक मजबूत बनाने में सहायक होंगे।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST



