लखनऊ, 3 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय में कर्मचारियों की गंभीर कमी ने कार्यालय के दैनिक कार्यों को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, बढ़ते प्रदूषण के मामलों और औद्योगिक इकाइयों की संख्या के मुकाबले स्टाफ की कमी के कारण फील्ड विजिट, कागजी कार्य, अदालती पेशी, बैठकें और नकली उद्योगों पर निगरानी लगभग ठप होकर रह गई है।
मुख्य समस्याएं:
- स्टाफ की कमी: क्षेत्रीय कार्यालय में स्वीकृत पदों के मुकाबले आधे से भी कम कर्मचारी उपलब्ध हैं। इससे फील्ड टीमों को औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे सरोजनीनगर, अमौसी, बांथरा, देवा रोड आदि) में नियमित निरीक्षण करने में दिक्कत हो रही है।
- कागजी कार्य और अदालती पेशी: कई महत्वपूर्ण फाइलें और रिपोर्ट तैयार नहीं हो पा रही हैं। कोर्ट केस में बोर्ड की तरफ से पेशी प्रभावित हो रही है, जिससे कई प्रदूषणकारी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई लंबित पड़ी है।
- बैठकों और समन्वय की समस्या: उच्चाधिकारियों की बैठकें और अन्य विभागों के साथ समन्वय प्रभावित हो रहा है।
- नकली उद्योगों की मनमानी: कई फर्जी उद्योग बिना रजिस्ट्रेशन और बिना बोर्ड की जानकारी के चल रहे हैं। ये कंपनियां लखनऊ के साथ-साथ आसपास के शहरों (जैसे बाराबंकी, उन्नाव, रायबरेली) में गंभीर प्रदूषण फैला रही हैं।
”फ्लाइंग स्क्वाड की अनुपस्थिति
सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्रदूषण की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए गठित विशेष ‘फ्लाइंग स्क्वाड‘ वर्तमान में कार्यालय में सक्रिय नहीं है। इस दल के अभाव में बोगस कंपनियां खुलेआम गंदा पानी नदियों में बहा रही हैं और हवा में जहरीला धुआं फैला रही हैं। स्थानीय उद्योगपति और पर्यावरण कार्यकर्ता लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण इन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही।
एक वरिष्ठ अधिकारी (नाम गोपनीय) ने बताया, “हमारे पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है। एक टीम को कई क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। फील्ड विजिट के लिए वाहन और मैनपावर दोनों की कमी है। नतीजतन कई फर्जी इकाइयां हमारी नजरों से बचकर चल रही हैं।”
पर्यावरणविदों की प्रतिक्रिया: पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि लखनऊ और आसपास के शहरों में नदियों व भूमिगत जल का प्रदूषण बढ़ रहा है। अगर बोर्ड में जल्द स्टाफ की भर्ती और ‘फ्लाइंग स्क्वाड‘ को सक्रिय नहीं किया गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया: UPPCB के उच्चाधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र स्टाफ बढ़ाने और विशेष टीम गठन का आश्वासन दिया है। हालांकि, क्षेत्रीय स्तर पर राहत अभी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है।
यह स्थिति न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि लखनऊ को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के सरकारी प्रयासों को भी कमजोर कर रही है। बोर्ड को जल्द ही कर्मचारियों की पूर्ति और प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू करने की जरूरत है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




