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लोकसभा में वंदे मातरम पर पीएम मोदी का ऐतिहासिक भाषण: ‘राष्ट्र एकता का प्रतीक, विभाजन की साजिश का शिकार’

नई दिल्ली, 8 दिसंबर 2025: संसद के शीतकालीन सत्र के छठे दिन लोकसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष बहस की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। दोपहर 12 बजे शुरू हुए इस बहस में पीएम मोदी ने भावुक और प्रेरणादायक भाषण देते हुए ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्र एकता का प्रतीक बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1937 में कांग्रेस ने गीत के महत्वपूर्ण छंदों को हटाकर विभाजन की बीज बो दी। 10 घंटे की इस बहस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समापन भाषण देंगे, जबकि राज्यसभा में चर्चा 9 दिसंबर को होगी।

बहस की शुरुआत: पीएम का भावुक संबोधन

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की अध्यक्षता में शुरू हुई बहस में पीएम मोदी ने कहा, “वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणा स्रोत है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत 150 वर्षों से भारत की आत्मा को जगाता रहा है। जदुनाथ भट्टाचार्य द्वारा संगीतबद्ध यह राष्ट्रगान हमें मातृभूमि के प्रति समर्पण की याद दिलाता है।”

पीएम ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि 1882 में ‘आनंदमठ’ उपन्यास में पहली बार प्रकाशित यह गीत स्वराज आंदोलन का आधार बना। उन्होंने जोर देकर कहा, “यह गीत विभाजनकारी नहीं, बल्कि एकताबद्ध करने वाला है। लेकिन 1937 में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में इसके छंदों को हटा दिया, जो देश के बंटवारे की शुरुआत थी। आज हम इस गीत को पूर्ण रूप से गाकर राष्ट्र एकता को मजबूत करेंगे।”

कांग्रेस पर हमला: ‘साजिश का शिकार’

भाषण के दौरान पीएम मोदी ने विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने वंदे मातरम को ‘सांप्रदायिक’ बताकर अपमानित किया। क्या राष्ट्रभक्ति सांप्रदायिक हो सकती है? यह गीत हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक था, लेकिन राजनीतिक साजिशों ने इसे कमजोर किया।” इस बयान पर सदन में हंगामा मच गया, और कांग्रेस सदस्यों ने आपत्ति जताई। कांग्रेस की ओर से गौरव गोगोई और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भाग लेंगे।

पीएम ने आगे कहा, “आज का भारत वंदे मातरम के मूल्यों पर खड़ा है। हमारा संकल्प है कि इस गीत को स्कूलों, कॉलेजों और हर सरकारी कार्यक्रम में अनिवार्य रूप से गाया जाए। यह विकसित भारत का आधार बनेगा।”

बहस के मुख्य बिंदु: इतिहास और प्रासंगिकता

बहस में वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। सदस्यों ने बताया कि यह गीत 1905 के बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक प्रेरणा स्रोत रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, गीत के 7 छंदों में मातृभूमि की आराधना है, जो सभी धर्मों के लिए समान रूप से प्रेरक है।

कांग्रेस के 8 सांसदों समेत विभिन्न दलों के नेता बोलेंगे। विपक्ष ने बहस को ‘राजनीतिकरण’ का आरोप लगाया, लेकिन पीएम ने इसे ‘राष्ट्र निर्माण का अवसर’ बताया।

आगे की चर्चा: राज्यसभा और वर्षगांठ समारोह

यह बहस वर्ष भर चलने वाले 150वीं वर्षगांठ समारोह का हिस्सा है। राज्यसभा में 9 दिसंबर को चर्चा होगी। सरकार ने घोषणा की है कि पूरे देश में वर्कशॉप, सेमिनार और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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