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ट्रंप का ईरान के नए सुप्रीम लीडर पर तीखा तंज: ‘वह शांति से नहीं जी सकेगा’, मध्य पूर्व युद्ध पर भेजा संदेश

वाशिंगटन, 10 मार्च 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई पर कड़ा प्रहार किया है। फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “मुझे विश्वास नहीं है कि वह शांति से जी सकेगा।” यह बयान मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तेज हो रही जंग के बीच आया है, जहां तेल आपूर्ति संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। ट्रंप का यह कमेंट न केवल ईरान को चेतावनी है, बल्कि उनके ‘पीस थ्रू स्ट्रेंथ’ (शक्ति से शांति) के सिद्धांत का भी प्रतीक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान युद्ध को लंबा खींचने का संकेत दे सकता है, जबकि ट्रंप ने साथ ही तेहरान से बातचीत की संभावना भी जताई।

ट्रंप का इंटरव्यू: खामेनेई पर सीधी चोट

फॉक्स न्यूज के चीफ फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट ट्रे यिंगस्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “मैं ईरान के इस नए चेहरे से खुश नहीं हूं। वह शांति से नहीं जी सकेगा।” ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है, और अगर तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल निर्यात रोका तो ‘कड़ी कार्रवाई’ होगी।

यह बयान सोमवार को फ्लोरिडा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के ठीक बाद आया, जहां ट्रंप ने मध्य पूर्व युद्ध को ‘जल्द समाप्त’ होने का संकेत दिया था। हालांकि, सीबीएस न्यूज को दिए एक फोन इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “युद्ध बहुत पूर्ण है,” लेकिन रिपब्लिकन सांसदों के साथ एक अलग कार्यक्रम में जोड़ा कि “यह अभी खत्म नहीं हुआ।” ट्रंप की यह दोहरी बातें युद्ध की अनिश्चितता को बढ़ा रही हैं, जहां इराक और सऊदी अरब ने उत्पादन घटा दिया है।

ट्रंप ने आगे कहा, “ईरान को समझना चाहिए कि अमेरिका मजबूत है। हम बात करने को तैयार हैं, लेकिन उनकी शर्तों पर नहीं।” यह बयान ईरान के साथ डिप्लोमेसी की गुंजाइश खोलता है, लेकिन विशेषज्ञ इसे ‘सॉफ्ट थ्रेट’ बता रहे हैं। रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप की गाजा योजना भी ईरान युद्ध के कारण स्थगित हो गई है, जहां हथियारबंदी की बातें चल रही थीं।

मध्य पूर्व संकट का वैश्विक असर: भारत पर नजर

ट्रंप का यह कमेंट वैश्विक स्तर पर तूफान ला सकता है। मध्य पूर्व में अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने क्षेत्रीय तेल निर्यात रोकने की धमकी दी है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश प्रभावित हो रहे हैं। दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 105 रुपये प्रति लीटर पार कर चुकी हैं, जबकि एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत ने घरेलू जीवन को मुश्किल बना दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ बैठक की, जहां वैकल्पिक स्रोतों पर जोर दिया गया।

अमेरिकी सैन्य कमांडरों पर भी विवाद हो रहा है। डेमोक्रेसी नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कमांडर ईरान युद्ध को ‘यीशु द्वारा अभिषिक्त’ बता रहे हैं, जो धार्मिक उन्माद को बढ़ावा दे रहा है। ट्रंप ने इस पर चुप्पी साधी, लेकिन उनके समर्थक इसे ‘पवित्र युद्ध’ का हिस्सा मान रहे हैं। इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के फंडिंग नेटवर्क पर एयरस्ट्राइक की, जो ट्रंप की नीति का समर्थन करती प्रतीत होती है।

विपक्षी नेता नैंसी पेलोसी ने ट्रंप के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा, “यह युद्ध को भड़काने वाली बयानबाजी है। अमेरिका को शांति की दिशा में कदम उठाने चाहिए।” वहीं, ट्रंप के समर्थक इसे ‘मजबूत नेतृत्व’ बता रहे हैं। न्यूजमैक्स होस्ट रॉब श्मिट ने कहा, “ट्रंप मध्य पूर्व को स्थिर कर रहे हैं, शक्ति से।”

ट्रंप की ‘पीस प्रेसिडेंट’ छवि: युद्ध और शांति का द्वंद्व

ट्रंप खुद को ‘पीस प्रेसिडेंट’ कहते हैं, जिन्होंने 2020 में अब्राहम समझौते से इजरायल-अरब शांति की। लेकिन 2026 में ईरान युद्ध ने उनकी छवि को चुनौती दी है। फॉक्स न्यूज इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि युद्ध ‘बोरिंग नहीं’ है, भले ही हताहत बढ़ रहे हों। यह बयान आलोचकों को ‘हल्का’ लग रहा है, जबकि समर्थक इसे ‘दृढ़ संकल्प’ मानते हैं।

व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि ट्रंप की प्राथमिकता ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करना है। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिकी सेनाएं सक्रिय हैं, जो ट्रंप की ‘शक्ति से शांति’ नीति का हिस्सा है। हालांकि, युद्ध लंबा खिंचा तो वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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