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किरेन रिजिजू का अविश्वास प्रस्ताव पर तीखा प्रहार: ‘विपक्ष की साजिश, लोकतंत्र का अपमान’ – संसद में BJP का कड़ा रुख

किरेन रिजिजू का अविश्वास प्रस्ताव पर तीखा प्रहार: ‘विपक्ष की साजिश, लोकतंत्र का अपमान’ – संसद में BJP का कड़ा रुख

नई दिल्ली, 10 मार्च 2026: केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने आज लोकसभा स्पीकर के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को कड़ाई से नकारा। उन्होंने इसे ‘लोकतंत्र के प्रति विपक्ष की साजिश’ करार देते हुए कहा कि यह प्रस्ताव न केवल संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है, बल्कि देश की प्रगति को बाधित करने की नाकाम कोशिश भी है। भाजपा ने कल 11 मार्च को होने वाली चर्चा के लिए सभी सांसदों को व्हिप जारी किया है, जो स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी इस प्रस्ताव को हर हाल में विफल करने के लिए तैयार है। रिजिजू का यह बयान विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच आया है, जहां कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी भी शुरू कर दी है।

अविश्वास प्रस्ताव का पृष्ठभूमि: विपक्ष का नया हथियार
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की शुरुआत विपक्ष के एक बड़े धड़े ने की है। कांग्रेस, टीएमसी, सपा और अन्य दलों के नेताओं का आरोप है कि स्पीकर ने सदन में विपक्ष की आवाज को दबाया है, खासकर बजट सत्र के दौरान। प्रस्ताव में दावा किया गया है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को पक्षपातपूर्ण तरीके से चलाया, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन हुआ। विपक्ष ने 106 सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए हैं, जो प्रस्ताव को पेश करने के लिए न्यूनतम संख्या से अधिक है।

इस बीच, भाजपा ने इसे ‘राजनीतिक बदले की भावना’ बताया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, “विपक्ष हार की भड़ास निकाल रहा है। 2024 के लोकसभा चुनावों में उनकी करारी हार को वे संसद में सेटल करने की कोशिश कर रहे हैं।” कल होने वाली बहस में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, लेकिन प्रस्ताव का असर सदन की कार्यवाही पर पड़ सकता है।

रिजिजू का धुआंधार हमला: ‘विपक्ष असफल हो जाएगा’
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने आज संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बातचीत में अविश्वास प्रस्ताव पर सीधी चोट की। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव लोकतंत्र का अपमान है। स्पीकर ने सदन को सुचारू रूप से चलाने का हर प्रयास किया, लेकिन विपक्ष अपनी हार को छिपाने के लिए ऐसी चालें चला रहा है। हम इस प्रस्ताव को न केवल अस्वीकार करेंगे, बल्कि विपक्ष को उनकी करतूतों का आईना भी दिखाएंगे।” रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने चुनावी हार के बाद संसद को अस्थिर करने का षड्यंत्र रचा है।

उन्होंने आगे जोर देकर कहा, “भाजपा और एनडीए का समर्थन स्पीकर के साथ है। कल की व्हिप अनिवार्य है, और हम हर सांसद से अपेक्षा करते हैं कि वे सदन में उपस्थित रहें। यह प्रस्ताव विपक्ष की नैतिक हार साबित करेगा।” रिजिजू का यह बयान भाजपा की रणनीति का हिस्सा लगता है, जहां पार्टी विपक्ष को ‘राष्ट्र-विरोधी’ करार देकर जनता का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने स्पीकर ओम बिरला की तारीफ करते हुए कहा, “स्पीकर ने सदन को गरिमामय बनाए रखा, जबकि विपक्ष ने हंगामा और नारेबाजी का सहारा लिया।”

भाजपा की रणनीति: व्हिप और सदन में काउंटर-अटैक
भाजपा ने आज सभी सांसदों को व्हिप जारी कर स्पष्ट संदेश दिया है कि अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान अनिवार्य है। पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा, “यह प्रस्ताव सदन को ठप करने की साजिश है। हम इसे विफल करेंगे और विपक्ष के असली चेहरे को उजागर करेंगे।” एनडीए के सहयोगी दलों जैसे जेडीयू और टीडीपी ने भी स्पीकर का समर्थन जताया है। जेडीयू नेता आरसीपी सिंह ने कहा, “अविश्वास प्रस्ताव का कोई आधार नहीं। यह विपक्ष की नाकामी है।”

विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “रिजिजू का बयान भाजपा की घबराहट दिखाता है। स्पीकर को जवाबदेह बनाना जरूरी है।” टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भी ट्वीट कर प्रस्ताव का समर्थन किया, “लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह कदम जरूरी है।”

राजनीतिक निहितार्थ: संसद सत्र पर असर
यह अविश्वास प्रस्ताव वर्तमान संसद सत्र के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। अगर प्रस्ताव पेश होता है, तो सदन की कार्यवाही कम से कम दो दिनों के लिए बाधित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा का बहुमत मजबूत होने से प्रस्ताव विफल हो जाएगा, लेकिन यह विपक्ष को 2029 के चुनावों से पहले एक मुद्दा दे सकता है। राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने कहा, “यह प्रस्ताव विपक्ष की एकजुटता का परीक्षण है। भाजपा इसे आसानी से पार कर लेगी, लेकिन विपक्ष को नैरेटिव बनाने का मौका मिलेगा।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन जताते हुए कहा, “संसद में सुधार भाजपा की प्राथमिकता है, न कि हंगामा।” रिजिजू का बयान भाजपा की आक्रामक रणनीति का हिस्सा है, जो विपक्ष को कमजोर करने पर केंद्रित है।

निष्कर्ष: लोकतंत्र की परीक्षा
किरेन रिजिजू का अविश्वास प्रस्ताव पर निंदा न केवल भाजपा का आधिकारिक रुख दर्शाती है, बल्कि पार्टी की संसदीय मजबूती का भी प्रतीक है। कल की बहस संसद में तलवारों की टक्कर का मैदान बनेगी, जहां विपक्ष और सत्ताधारी दल अपनी-अपनी ताकत दिखाएंगे। देश की नजरें इस राजनीतिक नाटक पर टिकी हैं, जो लोकतंत्र की मजबूती या कमजोरी का आईना साबित हो सकता है। उम्मीद है कि सदन की गरिमा बनी रहेगी और मुद्दों पर चर्चा हो।

 

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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