ईरान पर अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों के बीच अमेरिका और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक ‘स्पेशल रिलेशनशिप’ पर पहली बार गंभीर दरार पड़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर खुलकर हमला बोला है और कहा है कि “US-UK रिश्ता अब पहले जैसा नहीं रहा”। ट्रंप ने स्टार्मर को “हेल्पफुल नहीं” बताया और कहा कि ब्रिटेन ने शुरुआत में अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
ट्रंप ने ब्रिटिश अखबार द सन को दिए इंटरव्यू में कहा, “यह सबसे मजबूत रिश्ता था। अब हम यूरोप के दूसरे देशों जैसे फ्रांस और जर्मनी के साथ ज्यादा मजबूत संबंध रखते हैं। स्टार्मर ने मदद नहीं की। मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि ब्रिटेन से ऐसा होगा।”
क्या है पूरा विवाद?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई शीर्ष नेता मारे गए। अमेरिका ने ब्रिटेन से RAF फेयरफोर्ड (ग्लॉस्टरशायर) और डिएगो गार्सिया (हिंद महासागर) जैसे अड्डों का इस्तेमाल मांगा था।
ब्रिटेन ने शुरुआत में इनकार कर दिया। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन “आक्रामक कार्रवाई” में शामिल नहीं होगा और इराक युद्ध से सबक लिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और संसद की मंजूरी का हवाला दिया।
लेकिन 1 मार्च को स्थिति बदल गई। ईरान के जवाबी हमलों के बाद स्टार्मर ने अमेरिका को “सीमित और रक्षात्मक” इस्तेमाल की अनुमति दे दी। ब्रिटेन ने कहा कि उसके जेट ईरानी मिसाइलों को हवा में रोक रहे हैं और अमेरिका को ईरानी लॉन्चर और स्टोरेज को नष्ट करने के लिए अड्डे इस्तेमाल करने की इजाजत है।
स्टार्मर ने कहा, “हमारी खाड़ी के सहयोगी देशों ने ज्यादा मदद मांगी है। ब्रिटेन के नागरिकों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। लेकिन हम ‘आसमान से रिजीम चेंज’ के पक्ष में नहीं हैं।”
ब्रिटेन की स्थिति
- ब्रिटेन ने ईरान के जवाबी हमलों की निंदा की और फ्रांस-जर्मनी के साथ संयुक्त बयान जारी किया।
- ब्रिटेन ने रक्षात्मक भूमिका निभाई — कतर, साइप्रस और खाड़ी देशों में अपने जेट तैनात किए।
- विदेश सचिव ने कहा कि हमले की कानूनी वैधता अमेरिका को बतानी चाहिए।
ट्रंप का गुस्सा
ट्रंप ने स्टार्मर को “चर्चिल नहीं” बताया और कहा कि ब्रिटेन की वजह से हमले में देरी हुई। उन्होंने फ्रांस और जर्मनी की तारीफ की, जो ज्यादा सहयोगी रहे।
डाउनिंग स्ट्रीट ने जवाब दिया, “अमेरिका हमारा स्टॉन्च सहयोगी है। खुफिया जानकारी और सैन्य सहयोग पूरी तरह जारी है।”
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ ईरान युद्ध तक सीमित नहीं है। ट्रेड टैरिफ, ग्रीनलैंड और यूक्रेन जैसे मुद्दों पर भी पहले से तनाव था। लेकिन ईरान संकट ने ‘स्पेशल रिलेशनशिप’ को सबसे बड़ा झटका दिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय स्थिति पर नजर रखे हुए है क्योंकि मध्य पूर्व में फंसे लाखों भारतीयों की सुरक्षा US-UK समन्वय पर निर्भर करती है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




