नई दिल्ली, 15 जनवरी 2026 भारत का 77वां गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 को धूमधाम से मनाया जाएगा, और इस बार का मुख्य आकर्षण मुख्य अतिथियों की जोड़ी होगी। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। यह पहली बार है जब किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन के दो शीर्ष नेता संयुक्त रूप से भारत के गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि बनेंगे। इस आमंत्रण से भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच गहराते रिश्तों का संकेत मिलता है, खासकर मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर प्रगति की उम्मीद में।
मुख्य अतिथियों का परिचय
उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष हैं, जो ईयू की कार्यकारी शाखा का नेतृत्व करती हैं। वे जर्मनी की पूर्व रक्षा मंत्री रह चुकी हैं और वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और व्यापार नीतियों पर मजबूत आवाज हैं। वहीं, एंटोनियो कोस्टा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं, जो ईयू के 27 सदस्य देशों के नेताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री हैं और यूरोपीय एकीकरण तथा आर्थिक सहयोग के समर्थक माने जाते हैं। दोनों नेता 25 से 27 जनवरी तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। वे 26 जनवरी को कार्तव्य पथ पर होने वाली परेड में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और 27 जनवरी को 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे।
गणतंत्र दिवस परेड की झलकियां
गणतंत्र दिवस परेड भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और तकनीकी प्रगति का शानदार प्रदर्शन होती है। इस वर्ष की परेड में स्वदेशी हथियार प्रणालियां, जैसे अग्नि मिसाइलें, टी-90 टैंक और ड्रोन, विशेष रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे। विभिन्न राज्यों की झांकियां, सैन्य बैंड और वायुसेना के फ्लाई-पास्ट दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। मुख्य अतिथियों की उपस्थिति से परेड का अंतरराष्ट्रीय महत्व और बढ़ेगा, जो भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित करेगी।
महत्व और राजनयिक संदेश
यह आमंत्रण भारत की विदेश नीति में एक ऐतिहासिक कदम है, क्योंकि पहली बार ईयू को एक इकाई के रूप में मान्यता देते हुए उसके शीर्ष नेतृत्व को आमंत्रित किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के मद्देनजर, भारत यूरोप के साथ संबंधों को मजबूत कर रहा है, ताकि चीन की बढ़ती चुनौतियों और अमेरिकी अनिश्चितताओं का सामना किया जा सके। शिखर सम्मेलन में एफटीए पर हस्ताक्षर की संभावना है, जो व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग को मजबूत करेगी।
यह गणतंत्र दिवस न केवल भारत की संवैधानिक भावना का उत्सव होगा, बल्कि वैश्विक साझेदारी का प्रतीक भी बनेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मेजबानी में होने वाला यह कार्यक्रम पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित करेगा।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




