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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की केंद्रीय बजट 2026 रणनीति: विकास, सुधार और वित्तीय अनुशासन पर जोर

नई दिल्ली, 15 जनवरी 2026 केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट 2026 पेश करने वाली हैं, जो पहली बार रविवार को प्रस्तुत किया जाएगा। यह बजट ‘विकसित भारत’ की थीम पर आधारित होगा, जिसमें जीरो-पॉवर्टी, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन जैसे प्रमुख सिद्धांत शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सीतारमण की रणनीति वित्तीय अनुशासन, बुनियादी ढांचे में निवेश और कर सुधारों पर केंद्रित होगी, ताकि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके। इस बजट से रेलवे, रक्षा, एमएसएमई, बुनियादी ढांचा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

वित्तीय प्राथमिकताएं और राजकोषीय अनुशासन

सीतारमण की मुख्य रणनीति राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना है। वित्त वर्ष 2026 के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4% पर रखने का लक्ष्य है, जो नाममात्र जीडीपी वृद्धि के 10% के साथ समर्थित होगा। पूंजीगत व्यय में 10-12% की वृद्धि की उम्मीद है, विशेष रूप से सड़कों और रेलवे जैसे बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में, जो विकास और रोजगार पर गुणक प्रभाव डालेंगे। बजट में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को अनुशासित रखते हुए हार्ड और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर जोर दिया जाएगा, साथ ही एआई, रोबोटिक्स, स्पेस और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलेगी। इससे एमएसएमई और राज्य-स्तरीय पूंजीगत कार्यक्रमों को समर्थन मिलेगा, बिना मैक्रो स्थिरता को प्रभावित किए।

कर सुधार और अनुपालन में आसानी

कर सुधार सीतारमण की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। उद्योग नए आयकर अधिनियम 2025 के सावधानीपूर्ण रोलआउट की उम्मीद कर रहा है, जिसमें स्पष्ट दिशानिर्देश, टीडीएस युक्तिकरण, सीमा शुल्क टैरिफ सरलीकरण और विवाद समाधान तंत्र मजबूत किए जाएंगे। इससे मुकदमेबाजी कम होगी और नकदी प्रवाह मुक्त होगा। स्टार्टअप्स के लिए प्रारंभिक चरण के कर बोझ को कम करने और पहुंच में सुधार की योजनाएं हैं। नई कर व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कटौतियों में बदलाव और अन्य सुधारों पर विचार किया जा सकता है, जैसा कि बजट 2025 में किया गया था।

ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन

ग्रामीण विकास के लिए सीतारमण की रणनीति राज्य पूंजीगत व्यय विस्तार और मौजूदा योजनाओं की निरंतरता पर आधारित होगी। एमएसएमई के लिए अंतिम-मील समर्थन, आरएंडडी और हरित निवेश प्रोत्साहनों से कृषि-प्रसंस्करण और ग्रामीण आपूर्ति श्रृंखलाओं की उत्पादकता बढ़ेगी, बजाय बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष कृषि सब्सिडी के। रोजगार क्षेत्र में, नौकरी सृजन से जुड़े प्रोत्साहन, कर्मचारी लागत के लिए उच्च सीमाएं, एमएसएमई के लिए लक्षित क्रेडिट और क्षमता निर्माण पर फोकस होगा। तकनीक और बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश से कुशल नौकरियां सृजित होंगी, जो तत्काल रोजगार और लंबी अवधि की अपस्किलिंग का मिश्रण प्रदान करेंगे।

क्षेत्रीय फोकस और अन्य प्राथमिकताएं

बजट में रियल एस्टेट, रक्षा, एविएशन, शिक्षा, निर्यात और ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। टियर-2 शहरों में आवास मांग को बढ़ावा देने के लिए शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाया जाएगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में आवंटन बढ़ाने और जीएसटी सरलीकरण की मांग है। कुल मिलाकर, यह बजट ‘निरंतरता प्लस सुधार’ का उदाहरण होगा, जो वित्तीय सावधानी को लक्षित कर और क्षेत्रीय उपायों से संतुलित करेगा।

यह रणनीति भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, मुद्रास्फीति नियंत्रण और जीडीपी वृद्धि को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। बजट पेश होने के बाद इन योजनाओं का विस्तृत प्रभाव सामने आएगा, लेकिन पूर्वानुमान से स्पष्ट है कि सीतारमण का फोकस संतुलित विकास पर रहेगा।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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