इस्लामाबाद, 15 जनवरी 2026 पाकिस्तान के अशांत उत्तर वजीरिस्तान क्षेत्र में एक बड़े हमले में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों ने शेवा ब्रिज को विस्फोटकों से उड़ा दिया। यह घटना 14 जनवरी 2026 को शेवा तहसील में हुई, जहां ब्रिज कुर्रम नदी पर स्थित था। इस हमले से पाकिस्तानी सेना की महत्वपूर्ण आपूर्ति लाइनें प्रभावित हुई हैं, जिससे सैन्य अभियानों में बाधा उत्पन्न हो गई है।
घटना का विवरण
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने रात के अंधेरे में ब्रिज के नीचे बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री लगाई और इसे उड़ा दिया। विस्फोट इतना जोरदार था कि आसपास के कई किलोमीटर तक इसकी आवाज सुनाई दी। ब्रिज पूरी तरह से ध्वस्त हो गया, जिससे शेवा क्षेत्र को मीरानशाह, बनू और अन्य आसपास के इलाकों से जोड़ने वाली सड़कें कट गईं। पाकिस्तानी मीडिया जैसे डॉन ने इसे अज्ञात हमलावरों का काम बताया है, जबकि भारतीय मीडिया जैसे न्यूज18 ने सीधे टीटीपी को जिम्मेदार ठहराया है। सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह ब्रिज डुरंड लाइन के साथ स्थित था, जो पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा की ओर जाता है और सेना के लिए रणनीतिक महत्व रखता था।
सेना की आपूर्ति पर प्रभाव
इस विस्फोट से पाकिस्तानी सेना की कई अग्रिम चौकियां अलग-थलग पड़ गई हैं। सैनिकों को अब लंबे और अधिक असुरक्षित वैकल्पिक मार्गों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे सैन्य अभियानों में सैनिकों की आवाजाही, ईंधन काफिले और राशन आपूर्ति प्रभावित हुई है। उत्तर और दक्षिण वजीरिस्तान में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों पर इसका सीधा असर पड़ा है। सुरक्षा सूत्रों ने इसे टीटीपी के लिए एक बड़ी सफलता बताया है, जो सेना की तैनाती और लॉजिस्टिक्स को बाधित करने में कामयाब रही। घटना में किसी भी मौत या घायल होने की कोई रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
टीटीपी का पृष्ठभूमि और हालिया गतिविधियां
टीटीपी, जिसे पाकिस्तानी तालिबान के नाम से भी जाना जाता है, लंबे समय से पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में सक्रिय है। यह संगठन अफगान तालिबान से जुड़ा हुआ है और पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ जिहाद छेड़े हुए है। हाल के महीनों में टीटीपी की गतिविधियां बढ़ी हैं, जिसमें उत्तर वजीरिस्तान के मीर अली क्षेत्र में सेना की चौकियों पर हमले शामिल हैं, जहां कई सैनिक हताहत हुए थे। 2025 में टीटीपी ने 150 से अधिक हमलों की जिम्मेदारी ली है, जो क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति की नाजुकता को दर्शाता है। पाकिस्तानी सेना ने कई अभियान चलाए हैं, लेकिन सीमावर्ती इलाकों में कमजोर निगरानी के कारण ऐसे हमले जारी हैं।
प्रतिक्रियाएं और आगे की कार्रवाई
पाकिस्तानी सेना ने विस्फोट के बाद कई अभियान शुरू किए हैं और कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए मूल्यांकन कर रही है। हालांकि, इस बाधा का अभियानों पर लंबे समय तक प्रभाव पड़ सकता है। स्थानीय निवासियों में डर का माहौल है, जो वर्षों से आतंकवाद और सैन्य अभियानों से प्रभावित हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, यह घटना पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव को उजागर करती है।
यह हमला पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है और टीटीपी की मजबूत होती स्थिति को दर्शाता है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे हमलों से निपटने के लिए मजबूत खुफिया और सीमा सुरक्षा की जरूरत है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




