अम्मान/नई दिल्ली, 16 दिसंबर 2025 – भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में जॉर्डन में द्वितीय दिवस बिता रहे हैं। यह यात्रा न केवल भारत-जॉर्डन संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का माध्यम बनेगी, बल्कि पश्चिम एशिया और अफ्रीका में भारत की कूटनीतिक सक्रियता को भी मजबूत करेगी। आज का दिन द्विपक्षीय वार्ताओं, व्यापारिक सहयोग पर जोर और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से भरा रहा। पीएम मोदी ने जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय के साथ गहन चर्चा की, जिसमें क्षेत्रीय शांति, आतंकवाद विरोधी प्रयास और आर्थिक साझेदारी पर विशेष ध्यान दिया गया। यात्रा के इस चरण के समापन के बाद, पीएम मोदी एथियोपिया के लिए रवाना हो चुके हैं, जहां वे एथियोपियाई प्रधानमंत्री आबिय अहमद अली से मुलाकात करेंगे।
यात्रा का संदर्भ और महत्व
पीएम मोदी की यह जॉर्डन यात्रा 15-16 दिसंबर तक निर्धारित है, जो 75 वर्ष पुराने राजनयिक संबंधों की स्वर्ण जयंती पर हो रही है। यह 37 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की जॉर्डन की पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा है। कल (15 दिसंबर) को अम्मान पहुंचने पर पीएम मोदी का राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने अल-हुसैनीया महल में भव्य स्वागत किया था। यह महल जॉर्डन के शाही परिवार का आधुनिक कार्यालय है, जो 2006 में निर्मित हुआ और अरब-इस्लामी वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। यहां आयोजित शाही भोज के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-जॉर्डन संबंधों की समीक्षा की तथा क्षेत्रीय विकास पर विचार-विमर्श किया।
जॉर्डन भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, खासकर उर्वरक आपूर्ति के क्षेत्र में। द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में 2.8 अरब डॉलर के आसपास है, और पीएम मोदी की यात्रा से व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने की उम्मीद है। राजा अब्दुल्ला ने पीएम मोदी का स्वागत करते हुए कहा, “यह यात्रा हमारे आर्थिक सहयोग के लिए नई संभावनाएं खोलेगी।” वहीं, पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, “यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान करेगी।”
आज के प्रमुख आयोजन: द्विपक्षीय वार्ता और व्यापारिक मंच
16 दिसंबर का दिन पीएम मोदी के लिए व्यस्त रहा। सुबह अल-हुसैनीया महल में राजा अब्दुल्ला द्वितीय के साथ एक-से-एक वार्ता हुई, उसके बाद प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इन चर्चाओं में आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रुख, गाजा मुद्दे पर जॉर्डन की भूमिका तथा क्षेत्रीय शांति स्थापना पर जोर दिया गया। पीएम मोदी ने राजा अब्दुल्ला की मध्यस्थता प्रयासों की सराहना की, खासकर हिंसा विरोधी उग्रवाद पर 2015 की उनकी संयुक्त पहल का उल्लेख किया।
दोपहर में पीएम मोदी और राजा अब्दुल्ला ने संयुक्त रूप से ‘इंडिया-जॉर्डन बिजनेस फोरम’ को संबोधित किया। इस फोरम में दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों ने भाग लिया, जहां ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, डिजिटल तकनीक और उर्वरक क्षेत्र में निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय की दक्षिण एशिया सचिव डॉ. नीना मल्होत्रा ने बताया, “यह फोरम दोनों देशों के व्यापारिक हितधारकों के बीच नेटवर्किंग का मंच बनेगा।” फोरम के दौरान कई समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जो भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और जॉर्डन की आर्थिक विविधीकरण योजनाओं को मजबूत करेंगे।
इसके अलावा, पीएम मोदी ने युवराज अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय के साथ जॉर्डन संग्रहालय (जॉर्डन म्यूजियम) का दौरा किया। यहां प्राचीन सभ्यताओं के अवशेषों का प्रदर्शन है, जो भारत और जॉर्डन के प्राचीन व्यापारिक संबंधों को दर्शाते हैं। कुछ रिपोर्टों में पेट्रा शहर के दौरे का भी उल्लेख है, हालांकि मौसम के कारण यह संशोधित हो सकता है। पेट्रा, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, भारत की प्राचीन सिल्क रोड से जुड़ी हुई है। इस दौरे ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया।
एथियोपिया की ओर रवानगी: तीन देशों की यात्रा का दूसरा चरण
जॉर्डन यात्रा के समापन के बाद पीएम मोदी 16 दिसंबर को ही एथियोपिया के लिए रवाना हो गए। यह उनकी एथियोपिया की पहली द्विपक्षीय यात्रा है, जो 16-17 दिसंबर तक चलेगी। एथियोपिया के प्रधानमंत्री आबिय अहमद अली के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा में दोनों नेता व्यापार, विकास साझेदारी तथा बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। एथियोपिया अफ्रीकी संघ का मुख्यालय होने के नाते वैश्विक महत्व का केंद्र है, और भारत-एथियोपिया संबंध 1954 से मजबूत हैं।
पीएम मोदी एथियोपिया में एथियोपियाई व्यवसाय मंडल को संबोधित करेंगे तथा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर सहयोग पर जोर देंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा अफ्रीका महाद्वीप में भारत की ‘साउथ-साउथ’ साझेदारी को मजबूत करेगी। एथियोपिया के बाद पीएम मोदी 17-18 दिसंबर को ओमान का दौरा करेंगे, जहां 70 वर्ष पुराने संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान होगा।
यात्रा का व्यापक प्रभाव
यह तीन देशों की यात्रा भारत की सक्रिय विदेश नीति का प्रतीक है, जो पश्चिम एशिया और अफ्रीका में उभरती चुनौतियों के बीच अवसरों का लाभ उठाने पर केंद्रित है। जॉर्डन जैसे मित्र देशों के साथ मजबूत संबंध न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान देंगे। पीएम मोदी की यह यात्रा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को साकार करती है, जहां भारत वैश्विक शांति और समृद्धि का सेतु बन रहा है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




