लखनऊ, 15 दिसंबर 2025 (संवाददाता रिपोर्ट): उत्तर प्रदेश भाजपा को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को रविवार (14 दिसंबर) को सर्वसम्मति से उत्तर प्रदेश इकाई का अध्यक्ष चुना गया। यह नियुक्ति 2027 विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की रणनीति में एक बड़ा बदलाव का संकेत देती है। पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी की जगह लेने वाले चौधरी एक सात बार के सांसद हैं और उनकी नियुक्ति ओबीसी समुदाय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
घोषणा का क्षण: जोरदार तालियों के बीच नया चेहरा
लखनऊ के भाजपा मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने औपचारिक रूप से पंकज चौधरी के नाम की घोषणा की। गोयल ने कहा, “आज, 14 दिसंबर को मुझे बहुत खुशी हो रही है कि पंकज चौधरी जी को सर्वसम्मति से उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष चुना गया है।” घोषणा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत वरिष्ठ नेताओं ने चौधरी का स्वागत किया। चौधरी ने मुख्यमंत्री के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, जो इस कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण साबित हुआ।
चौधरी ने अपने संबोधन में कहा, “यह नियुक्ति जाति या वंशवाद से ऊपर उठकर संगठन की मजबूती के लिए है। हम 2027 के चुनावों में विकास और राम मंदिर जैसे मुद्दों पर जनता के बीच जाएंगे।” कार्यक्रम में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जोरदार तालियों से स्वागत किया, और मिठाइयां बांटकर उत्सव का माहौल बन गया।
पंकज चौधरी कौन हैं? ग्रामीण जमींदार से केंद्रीय मंत्री तक का सफर
61 वर्षीय पंकज चौधरी का जन्म महराजगंज जिले के एक ग्रामीण परिवार में हुआ था। वे कुर्मी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रभावशाली ओबीसी जाति है। चौधरी ने अपनी राजनीतिक यात्रा 1989-91 में गोरखपुर नगर निगम के सदस्य के रूप में शुरू की। उसके बाद वे लगातार सात बार महराजगंज से लोकसभा सांसद चुने गए। 2019 में वे दूसरी मोदी सरकार में वित्त राज्य मंत्री बने।
उनकी छवि एक कट्टर संगठनकर्ता की है। पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडे के समक्ष शनिवार (13 दिसंबर) को उन्होंने नामांकन दाखिल किया, और कोई अन्य उम्मीदवार न होने से वे निर्विरोध चुने गए। चौधरी उत्तर प्रदेश भाजपा के 15वें अध्यक्ष हैं, हालांकि यह 17वीं नियुक्ति है क्योंकि पूर्व अध्यक्ष कलराज मिश्र तीन बार चुने गए थे।
राजनीतिक संदर्भ: 2027 चुनावों से पहले ओबीसी आउटरीच
यह नियुक्ति भाजपा की रणनीति का हिस्सा है, जो 2026 पंचायत चुनावों और 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने पर केंद्रित है। पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी के कार्यकाल में पार्टी को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा, खासकर लोकसभा चुनावों में। चौधरी की नियुक्ति से पूर्वांचल में पार्टी की पकड़ मजबूत होने की उम्मीद है, क्योंकि महराजगंज गोरखपुर मंडल का हिस्सा है, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुर्मी समुदाय से चौधरी का चयन सपा और बसपा जैसे दलों के ओबीसी वोटों को तोड़ने की कोशिश है। चौधरी ने कहा, “हम जाति की राजनीति नहीं, बल्कि सेवा की राजनीति करेंगे।” भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है, जिससे पार्टी में कोई आंतरिक कलह न हो।
प्रतिक्रियाएं: नेताओं का समर्थन, विपक्ष का तंज
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चौधरी को बधाई देते हुए कहा, “पंकज जी का नेतृत्व पार्टी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।” उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसे “संगठन की मजबूती” बताया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “यह नियुक्ति उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू करेगी।”
विपक्ष ने तंज कसा। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, “भाजपा फिर वही पुरानी रट लगाएगी, लेकिन जनता सब देख रही है।” बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, “ओबीसी चेहरा बदलना काफी नहीं, वास्तविक कल्याण जरूरी है।”
आगे की राह: चुनौतियां और उम्मीदें
चौधरी के नेतृत्व में भाजपा को आगामी पंचायत चुनावों में संगठन को मजबूत करना होगा। पूर्वांचल में सपा की बढ़ती पैठ और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने की चुनौतियां हैं। लेकिन उनकी अनुभवी छवि और योगी आदित्यनाथ के साथ निकट संबंध पार्टी के लिए वरदान साबित हो सकते हैं।
यह नियुक्ति न केवल भाजपा बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति को नया मोड़ देगी। 2027 के चुनावों में चौधरी की भूमिका निर्णायक होगी।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




