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सिडनी के बोंडी बीच पर खौफनाक हमला: 12 लोगों की मौत, पाकिस्तानी कनेक्शन से सनसनीखेज खुलासा

सिडनी, 15 दिसंबर 2025 (एजेंसी रिपोर्ट): ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर के प्रसिद्ध बोंडी बीच पर रविवार दोपहर एक चरमपंथी हमलावर ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी, जिसमें 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हमलावर सहित मरने वालों की संख्या 12 बताई जा रही है। यह हमला यहूदियों को निशाना बनाने के इरादे से किया गया लगता है, और प्रारंभिक जांच में हमलावर के पाकिस्तान से जुड़े लिंक सामने आए हैं। घटना ने पूरे ऑस्ट्रेलिया को सदमे में डाल दिया है, जबकि स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां तेजी से जांच में जुटी हुई हैं।

घटना का विवरण: बीच पर छुट्टियों का मजा बना खौफ का सबब

बोंडी बीच, जो अपनी सुनहरी रेत और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है, रविवार दोपहर करीब 2 बजे एक खूनी खेल का मैदान बन गया। चश्मदीदों के अनुसार, एक अज्ञात व्यक्ति ने अचानक हथियार निकाल लिया और भीड़ पर फायरिंग शुरू कर दी। बीच पर सैर-सपाटे के लिए मौजूद परिवार, पर्यटक और स्थानीय निवासी निशाने पर थे। हमलावर ने विशेष रूप से यहूदी समुदाय के लोगों को टारगेट किया, जो क्षेत्र में छुट्टियां मना रहे थे।

एक चश्मदीद, जो एक ब्रिटिश पर्यटक है, ने बताया, “हम समुद्र के किनारे चाय पी रहे थे। अचानक गोलीबारी की आवाजें गूंजीं। लोग चीखने लगे, बच्चे इधर-उधर भागे। हमलावर ने ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए फायरिंग की। मैंने किसी तरह अपनी पत्नी को खींचकर एक रॉक के पीछे छिपा लिया।” प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावर ने करीब 10-15 मिनट तक फायरिंग जारी रखी, जिसमें कई लोग घायल हो गए। ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हमलावर को मार गिराया।

मरने वालों में एक प्रमुख यहूदी नेता भी शामिल हैं, जिनका नाम डेविड कोहेन है। कोहेन पर गोली उनके सिर में लगी, और वे मौके पर ही शहीद हो गए। दिल दहला देने वाली बात यह है कि कोहेन 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में हुए हमास के हमले में बाल-बाल बच चुके थे। वे ऑस्ट्रेलिया में एक शांति सम्मेलन में भाग लेने आए थे। उनके परिवार ने कहा, “यह एक साजिश है। वे हमेशा शांति की बात करते थे, लेकिन नफरत ने उन्हें छीन लिया।”

हीरो उभरा: अहमद अल-अहमद की बहादुरी ने बचाई कई जानें

इस खौफनाक घटना में एक चमकता सितारा उभरा – अहमद अल-अहमद। अहमद, जो सिडनी में रहने वाले एक फिलिस्तीनी मूल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं, ने हमलावर से बंदूक छीनकर उसी पर तान दी। चश्मदीदों के मुताबिक, अहमद बीच पर जॉगिंग कर रहे थे जब हमला हुआ। उन्होंने बिना सोचे-समझे हमलावर पर झपट्टा मारा और उसकी AK-47 राइफल को कब्जे में ले लिया।

अहमद ने पुलिस को दिए बयान में कहा, “मैंने सिर्फ सोचा कि यह रुकना चाहिए। नफरत किसी का भी नहीं होनी चाहिए। मैं फिलिस्तीनी हूं, लेकिन यहूदी भाई-बहनों को बचाना मेरा फर्ज था।” उनकी इस बहादुरी से कम से कम 5-6 लोगों की जान बच गई। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने अहमद को ‘राष्ट्रीय हीरो’ करार देते हुए कहा, “आज का दिन दुख का है, लेकिन अहमद जैसे लोग हमें उम्मीद देते हैं। वे साबित करते हैं कि मानवता धर्म से ऊपर है।”

पाकिस्तानी कनेक्शन: जांच में सनसनीखेज खुलासे

ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस (AFP) और ASIO (ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा खुफिया संगठन) की जांच में हमलावर की पहचान अब्दुल्लाह खान के रूप में हुई है। 28 वर्षीय खान, जो लंदन में पैदा हुआ था, हाल ही में पाकिस्तान से ऑस्ट्रेलिया आया था। प्रारंभिक पूछताछ और उसके फोन डेटा से पता चला है कि वह पाकिस्तान स्थित एक चरमपंथी संगठन से जुड़ा था, जो ISIS के सहयोगी के रूप में जाना जाता है।

पुलिस ने खान के सिडनी स्थित फ्लैट पर छापा मारा, जहां से हथियार, विस्फोटक सामग्री और चरमपंथी प्रचार सामग्री बरामद हुई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “खान का पाकिस्तान लिंक स्पष्ट है। वह वहां एक ट्रेनिंग कैंप में गया था। हम अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर पूरी नेटवर्क को उजागर करेंगे।” पाकिस्तानी सरकार ने इसकी निंदा की है और जांच में सहयोग का वादा किया है।

पृष्ठभूमि: बढ़ते इस्लामोफोबिया और यहूदी-विरोधी भावनाओं का साया

यह हमला वैश्विक स्तर पर बढ़ते नफरत के माहौल का हिस्सा लगता है। मध्य पूर्व संघर्ष के बाद से ऑस्ट्रेलिया में यहूदी समुदाय पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। सिडनी में पिछले साल 20 से अधिक ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे प्रोपेगैंडा ने युवाओं को कट्टर बना दिया है।

यहूदी समुदाय के नेता रब्बी जोनाथन सैक्स ने कहा, “यह हमला सिर्फ ऑस्ट्रेलिया का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है। हमें एकजुट होकर नफरत का मुकाबला करना होगा।” दूसरी ओर, मुस्लिम संगठनों ने हमले की कड़ी निंदा की है और कहा है कि यह इस्लाम का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

प्रतिक्रियाएं और आगे की राह

ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है। प्रधानमंत्री अल्बनीज ने संसद में कहा, “हम अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। सुरक्षा बजट बढ़ाया जाएगा और खुफिया नेटवर्क मजबूत किया जाएगा।” संयुक्त राष्ट्र और इजरायल ने भी हमले की निंदा की है।

घायलों का इलाज सिडनी के प्रमुख अस्पतालों में चल रहा है, जहां 25 से अधिक लोग भर्ती हैं। पुलिस ने पूरे शहर में सुरक्षा बढ़ा दी है, खासकर धार्मिक स्थलों पर।

यह घटना न केवल ऑस्ट्रेलिया बल्कि पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर रही है कि आखिर कब रुकेगी यह नफरत की होड़। शांति और एकता ही इसका एकमात्र हल है।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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