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मुंबई को पगड़ी सिस्टम से मुक्त करने का ऐतिहासिक फैसला: उपमुख्यमंत्री शिंदे का विधानसभा में बड़ा ऐलान

मुंबई, 12 दिसंबर 2025 (संवाददाता): महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को विधानसभा में एक महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसमें मुंबई को दशकों पुरानी ‘पगड़ी सिस्टम’ से मुक्त करने के लिए अलग नियामक ढांचा तैयार करने की बात कही गई। यह कदम मुंबई की पुरानी पगड़ी भवनों के निष्पक्ष और उचित पुनर्विकास सुनिश्चित करेगा, साथ ही किरायेदारों और मकान मालिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा। शिंदे ने इसे ‘ऐतिहासिक निर्णय’ बताते हुए कहा कि इससे लाखों निवासियों को स्वामित्व वाले घर मिलेंगे और भवनों के ढहने जैसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।

शिंदे ने बताया कि मुंबई में लगभग 19,000 से अधिक भवन पगड़ी प्रणाली के अंतर्गत आते हैं, जो ज्यादातर 1960 से पहले बने हैं। इनमें से कुछ का पुनर्विकास हो चुका है, कुछ ढह चुके हैं, जबकि 13,000 से अधिक अभी भी पुनर्विकास का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये भवन किरायेदारों और उनके समझौतों के लिए कानूनी रूप से वैध हैं। महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत किरायेदारों को संरक्षण दिया गया है, लेकिन मकान मालिकों को अक्सर उचित मुआवजा नहीं मिलता।” इस नई व्यवस्था से किरायेदारों को उनके कब्जे वाले क्षेत्र के बराबर एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) मिलेगा, जबकि मकान मालिकों को भूमि स्वामित्व के आधार पर मूल एफएसआई और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) तथा निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लिए मुफ्त पुनर्निर्माण के लिए प्रोत्साहन एफएसआई प्रदान किया जाएगा।

पगड़ी सिस्टम क्या है और क्यों है विवादास्पद?

पगड़ी प्रणाली मुंबई की एक पारंपरिक किरायेदारी मॉडल है, जिसमें किरायेदार घर का आंशिक मालिक होता है। वे नाममात्र किराया देते हैं और संपत्ति को सब-लेट या बेचने का अधिकार रखते हैं (अन्य मालिकों की सहमति से)। यह सिस्टम 1940 के दशक से प्रचलित है और किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत मान्य है। हालांकि, यह मकान मालिकों के लिए नुकसानदेह साबित हुआ है, क्योंकि किरायेदारों के पुनर्वास अधिकारों के कारण मुआवजा कम मिलता है। छोटे कारण न्यायालयों में 28,000 से अधिक मामले लंबित हैं, जो पुनर्विकास को बाधित करते हैं।

शिंदे ने कहा कि सरकार इन लंबित मामलों को तीन वर्षों के भीतर निपटाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करेगी। इससे न केवल विवाद सुलझेंगे, बल्कि मुंबई के घनी आबादी वाले इलाकों में रुके हुए 13,000 से अधिक प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी। यह घोषणा बीएमसी चुनावों से पहले आई है, जो शहर के हजारों घर मालिकों को प्रभावित कर सकती है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

यह नई नीति मुंबई को पगड़ी सिस्टम से मुक्त करने की दिशा में बड़ा कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पुराने भवनों का पुनर्विकास तेज होगा, जिससे शहर की बुनियादी ढांचा मजबूत बनेगा और जान-माल की हानि रोकी जा सकेगी। किरायेदारों को पूर्ण स्वामित्व वाले घर मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी, जबकि मकान मालिकों को न्यायोचित मुआवजा सुनिश्चित होगा। शिंदे ने जोर दिया कि न तो किरायेदारों को और न ही मकान मालिकों को अन्याय का सामना करना पड़ेगा।

महाराष्ट्र सरकार ने साथ ही लगभग 20,000 भवनों के लिए ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) को नियमित करने की योजना भी घोषित की है, जो बीएमसी चुनावों से पहले एक बड़ा उपहार साबित हो सकती है। यह कदम डिजिटल इंडिया और शहरी विकास के लक्ष्यों को मजबूत करेगा।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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