बहराइच, 11 दिसंबर 2025 (संवाददाता): उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में अक्टूबर 2024 में दुर्गा पूजा विसर्जन जुलूस के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े रामगोपाल मिश्रा हत्याकांड में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। स्थानीय सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी सरफराज उर्फ रिंकू को फांसी की सजा सुनाई है, जबकि उसके पिता अब्दुल हमीद सहित 9 अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। यह फैसला समाज में व्याप्त हिंसा के खिलाफ न्यायिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (प्रथम) पवन कुमार शर्मा की अदालत ने गुरुवार को यह सजा सुनाई। रामगोपाल मिश्रा (22 वर्षीय) की हत्या महाराजगंज गांव में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई थी, जब एक समूह ने जुलूस पर हमला कर दिया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सरफराज ने गोली चलाकर रामगोपाल की हत्या की, जो घटना के दौरान हुई भयावह हिंसा का प्रतीक बनी। अदालत ने इसे ‘राक्षसी यातना’ करार देते हुए कहा कि ‘मानवता इससे कराह उठी’। फैसले में मनुस्मृति का एक श्लोक भी उद्धृत किया गया, जो अपराध की गंभीरता को रेखांकित करता है।
घटना का विवरण
14 अक्टूबर 2024 को बहराइच के महाराजगंज क्षेत्र में दुर्गा पूजा का विसर्जन जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से निकल रहा था। अचानक एक समूह ने जुलूस पर पथराव किया और हथियारों से लैस होकर हमला बोल दिया। इसी दौरान सरफराज ने रामगोपाल पर गोली चलाई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हिंसा में कई अन्य लोग घायल हुए और क्षेत्र में तनाव फैल गया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया।
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(2) (हत्या) के तहत सरफराज को फांसी की सजा सुनाई, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पुष्टि के अधीन है। अन्य 9 दोषियों को धारा 103(2), 191(2) (दंगा), 191(3) (हथियारबंद दंगा) तथा आर्म्स एक्ट के तहत आजीवन कारावास और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। दोषियों में सरफराज के पिता अब्दुल हमीद, भाई फहीम और तालिब उर्फ साब्लू, सैफ अली, जावेद खान, जीशान उर्फ राजा उर्फ साहिर, नंकू, मरूफ अली और शोएब खान शामिल हैं।
अभियोजन पक्ष के अतिरिक्त जिला सरकारी वकील पीके सिंह ने बताया, “यह फैसला अपराधियों के लिए चेतावनी है। सबूतों के आधार पर दोष सिद्ध हुआ।” बचाव पक्ष के वकील मुक्तार आलम ने कहा कि वे हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
तीन आरोपी बरी
अदालत ने सबूतों के अभाव में तीन अन्य आरोपी खुरशीद, शकील और अफजल को बरी कर दिया। कुल 13 लोगों पर मुकदमा चलाया गया था, जिनमें से 10 दोषी पाए गए।
सामाजिक प्रभाव
यह घटना बहराइच में सांप्रदायिक सद्भाव को झकझोरने वाली थी। विसर्जन जुलूस पर हमले ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया था, और पुलिस को भारी सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा। फैसले के बाद स्थानीय लोगों में न्याय की उम्मीद जगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सजा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में सहायक होगी।
अदालत ने फैसले में समाज को झकझोरने वाले अपराधों पर सख्ती का संदेश दिया है। सरफराज (25 वर्षीय) को फांसी की सजा के साथ ही अन्य दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास सुनाया गया, जो अपराध की क्रूरता को दर्शाता है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




