मुंबई, 5 दिसंबर 2025 – भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 274वीं बैठक में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया। यह कटौती पिछले दो वर्षों में चौथी बार की गई है, जिससे बैंकों के माध्यम से ऋणों की ब्याज दरें कम होंगी और आम आदमी के लिए होम लोन, कार लोन तथा कारोबारी ऋण सस्ते हो जाएंगे। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि यह फैसला वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू विकास दर के अनुमान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी विकास अनुमान को 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.7 प्रतिशत किया गया है, जो अर्थव्यवस्था में मजबूती का संकेत देता है। यह घोषणा पुतिन के भारत दौरे के बीच आई, जो रक्षा और व्यापार सहयोग को मजबूत करने के साथ आर्थिक स्थिरता पर भी जोर दे रही है।
रेपो रेट कटौती का मतलब: क्या होगा प्रभाव?
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को अल्पकालिक ऋण प्रदान करता है। इसकी कटौती से बैंकों का उधार सस्ता होता है, जो आगे चलकर ग्राहकों तक पहुंचता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कटौती 0.25 प्रतिशत होने से होम लोन की ईएमआई में 20-30 रुपये प्रति लाख की कमी आ सकती है। उदाहरण के लिए, 50 लाख के 20 वर्षीय होम लोन पर मासिक किस्त में करीब 1,000-1,500 रुपये की बचत होगी।
आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट को 6.00 प्रतिशत पर स्थिर रखा, जबकि कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) और स्टेट्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो (एसएलआर) में कोई बदलाव नहीं किया। मुद्रास्फीति (सीपीआई) का अनुमान 4.8 प्रतिशत रखा गया है, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब है। गवर्नर दास ने कहा, “हमारी नीति विकास और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।”
एमपीसी बैठक: सर्वसम्मति से फैसला, विकास पर जोर
एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक 3-5 दिसंबर को चली, जिसमें छह सदस्यों ने सर्वसम्मति से रेपो रेट कटौती का समर्थन किया। समिति के सदस्यों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की हालिया दरों में स्थिरता और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की कटौती को ध्यान में रखा। भारत में मॉनसून की अच्छी बरसात, कृषि उत्पादन में वृद्धि और विनिर्माण क्षेत्र की रिकवरी ने विकास अनुमान को ऊपर धकेला।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए तिमाही अनुमान इस प्रकार हैं:
- Q1: 7.2 प्रतिशत
- Q2: 7.5 प्रतिशत
- Q3: 7.8 प्रतिशत
- Q4: 8.0 प्रतिशत
आरबीआई ने विदेशी मुद्रा भंडार को 670 अरब डॉलर पर स्थिर बताया, जो रुपये की स्थिरता सुनिश्चित करेगा। हालांकि, ग्लोबल तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी शुल्कों से जुड़े जोखिमों पर सतर्कता बरतने की सलाह दी गई।
बाजार की प्रतिक्रिया: सेंसेक्स में उछाल, बैंक शेयर चमके
घोषणा के तुरंत बाद बीएसई सेंसेक्स 450 अंक चढ़कर 82,500 के स्तर को पार कर गया, जबकि एनएसई निफ्टी 150 अंक ऊपर बंद हुआ। बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर के शेयरों में 2-4 प्रतिशत की तेजी आई। एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस जैसे स्टॉक्स प्रमुख लाभकर्ता रहे।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कटौती क्रिसमस और न्यू ईयर की खरीदारी को बढ़ावा देगी। सीआईआई के चेयरमैन संजीव सान्याल ने कहा, “यह फैसला निवेश और उपभोग को प्रोत्साहित करेगा, जिससे रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।” हालांकि, कुछ अर्थशास्त्री जैसे जोसेफ स्टिग्लिट्ज ने चेतावनी दी कि यदि मुद्रास्फीति बढ़ी, तो अगली बैठक में रिवर्स कटौती संभव है।
आम आदमी पर असर: सस्ते लोन से बढ़ेगा उपभोग
- होम लोन: ब्याज दरें 8.5-9 प्रतिशत तक गिर सकती हैं, जिससे मध्यम वर्ग के लिए घर खरीद आसान होगी।
- पर्सनल लोन: क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन पर ब्याज 1-2 प्रतिशत कम।
- एमएसएमई सेक्टर: छोटे कारोबारियों को सस्ता ऋण मिलेगा, जो रोजगार बढ़ाएगा।
- निवेश: म्यूचुअल फंड और इक्विटी में निवेश बढ़ सकता है।
सरकार ने भी स्वागत किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट किया, “आरबीआई का यह कदम आत्मनिर्भर भारत को गति देगा।”
वैश्विक संदर्भ: पुतिन दौरे के साथ आर्थिक मजबूती
यह फैसला रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे के साथ आया, जहां ऊर्जा और रक्षा सौदों पर चर्चा हो रही है। रूस से सस्ता कच्चा तेल आयात पहले से ही मुद्रास्फीति को नियंत्रित कर रहा है। अगली एमपीसी बैठक फरवरी 2026 में होगी, जहां और कटौती की संभावना पर नजर रहेगी।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




