अजमेर, 5 दिसंबर 2025 – राजस्थान के अजमेर में विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह शरीफ को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से गुरुवार दोपहर पूरे शहर में हड़कंप मच गया। जिला कलेक्टर की आधिकारिक ईमेल आईडी पर प्राप्त धमकी भरे मेल में दावा किया गया था कि दरगाह परिसर में चार स्थानों पर आरडीएक्स आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) लगाए गए हैं, जो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत पहुंचते ही विस्फोट करेंगे। इस धमकी ने न केवल स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर ला दिया, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों को भी हाई अलर्ट मोड में डाल दिया। घंटों चले व्यापक सर्च ऑपरेशन के बाद अजमेर एसपी वंदिता राणा ने राहत भरी खबर दी कि कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली और ‘चिंता की कोई बात नहीं’ है। यह घटना पुतिन के दो दिवसीय भारत दौरे के ठीक बीच में घटी, जिससे वैश्विक सुरक्षा चिंताओं को नई ऊंचाई मिल गई।
धमकी का खुलासा: पुतिन के दौरे से जुड़ा संदिग्ध मेल
गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे जिला कलेक्टर कार्यालय की आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक अज्ञात व्यक्ति से धमकी भरा मेल प्राप्त हुआ। मेल में साफ-साफ लिखा था कि अजमेर दरगाह शरीफ और कलेक्ट्रेट परिसर में चार आरडीएक्स आईईडी प्लांट किए गए हैं। धमकी देने वाले ने यह भी दावा किया कि ये विस्फोटक रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत आगमन के साथ ही सक्रिय हो जाएंगे। मेल में कुडनकुलम परमाणु संयंत्र का भी जिक्र था, जो दक्षिण भारत में स्थित है, लेकिन मुख्य निशाना अजमेर की दरगाह ही था।
यह घटना पुतिन के भारत दौरे के संदर्भ में और भी संवेदनशील हो जाती है, क्योंकि रूसी राष्ट्रपति 4-5 दिसंबर को दिल्ली में हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह धमकी भारत-रूस संबंधों को निशाना बनाने की साजिश हो सकती है, खासकर यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक तनाव के दौर में। मेल प्राप्त होते ही कलेक्टर कार्यालय और दरगाह परिसर को तुरंत खाली करा दिया गया। सैकड़ों श्रद्धालु बाहर निकाले गए, और प्रवेश द्वारों पर सख्ती बरतते हुए पूर्ण निषेधाज्ञा लागू कर दी गई।
सर्च ऑपरेशन: एटीएस, पुलिस और आईबी की संयुक्त कार्रवाई
धमकी मिलते ही अजमेर पुलिस ने तत्काल एक्शन लिया। एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस), सिविल डिफेंस, बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वायड (बीडीएस), डॉग स्क्वायड और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की टीमें मौके पर पहुंचीं। कलेक्ट्रेट परिसर की तलाशी पहले पूरी की गई, उसके बाद दरगाह के विशाल परिसर में व्यापक सर्च शुरू हुआ। दरगाह के मुख्य हॉल, कोटरी, चबूतरा शरीफ और आसपास के क्षेत्रों सहित चारों ओर से छानबीन की गई।
ऑपरेशन करीब दो से तीन घंटे चला, जिसमें ड्रोन, मेटल डिटेक्टर और स्निफर डॉग्स का इस्तेमाल किया गया। अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने बताया कि दरगाह प्रबंधन ने भी पूर्ण सहयोग किया और श्रद्धालुओं को शांतिपूर्वक बाहर निकाला। सर्च के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। हालांकि, ईमेल की जांच साइबर सेल को सौंपी गई है, और प्रेषक की पहचान के लिए केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली जा रही है। अजमेर एसएसपी वंदिता राणा ने कहा, “यह एक वास्तविक धमकी है, इसलिए हमने इसे गंभीरता से लिया। लेकिन सर्च के बाद स्थिति सामान्य है।”
एसपी का बयान: ‘चिंता की कोई बात नहीं, लेकिन सतर्कता बरतें’
सर्च ऑपरेशन समाप्त होने के बाद अजमेर एसपी वंदिता राणा ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कहा, “धमकी भरा ईमेल प्रशासन की अधिकृत आईडी पर आया था, जिसमें दरगाह और कलेक्ट्रेट को उड़ाने की बात कही गई थी। हमने सभी विभागों को सक्रिय किया। कलेक्ट्रेट की पूरी जांच हो चुकी है, और अब दरगाह परिसर की तलाशी पूरी हो गई। फिलहाल कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। चिंता की कोई बात नहीं है।” एसपी ने यह भी जोड़ा कि यह कोई मॉक ड्रिल नहीं, बल्कि वास्तविक खतरे पर कार्रवाई थी, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है।
उनके इस बयान से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में राहत की सांस बही। दरगाह परिसर दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया, हालांकि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। प्रवेश पर सीसीटीवी निगरानी बढ़ा दी गई है, और आसपास के क्षेत्रों में गश्त तेज कर दी गई। एसपी ने अपील की कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
पृष्ठभूमि और संभावित साजिश: पुतिन दौरे का कनेक्शन
यह घटना 2007 के अजमेर दरगाह बम विस्फोट की याद दिला देती है, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे। उस समय भी धार्मिक स्थल को निशाना बनाया गया था। वर्तमान धमकी में पुतिन का जिक्र विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि भारत-रूस संबंध इन दिनों रक्षा सौदों और ऊर्जा सहयोग के केंद्र में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह साइबर हमला या विदेशी ताकतों की साजिश हो सकती है, जो भारत की बहुपक्षीय नीति को कमजोर करने का प्रयास है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के कार्यालय से भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है। साथ ही, केंद्र सरकार ने राजस्थान प्रशासन को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। दरगाह कमेटी ने भी बयान जारी कर कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज की रोशनी में कोई बुराई टिक नहीं सकती, और वे प्रार्थना कर रहे हैं कि शांति बनी रहे।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




