भुवनेश्वर, 27 नवंबर 2025 (विशेष संवाददाता): भारत की प्रथम आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी द्रौपदी मुर्मु ने आज ओडिशा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के प्रारंभिक दिन पर सदस्यों को संबोधित करते हुए भावुक हो गईं। ओडिशा की अपनी जन्मभूमि लौटकर उन्होंने इसे ‘घर वापसी’ करार दिया और अपनी विधायक के रूप में बिताए पुराने दिनों की यादें ताजा कीं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ओडिशा विधानसभा को संबोधित करने वाली पहली राष्ट्रपति बनीं, जो उनके विधायी इतिहास को सम्मानित करने वाला ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ।
भुवनेश्वर में स्वागत और संबोधन का आरंभ
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज सुबह भुवनेश्वर पहुंचीं, जहां राज्यपाल राघुबीर दास, मुख्यमंत्री मोहन चरण महतो और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत किया। विधानसभा पहुंचने पर विधायकों ने जोरदार तालियों से उनका अभिवादन किया। संबोधन की शुरुआत में राष्ट्रपति ने कहा, “यह मेरे लिए घर वापसी जैसा है। यहां की ये सीटें, ये दीवारें मुझे मेरे विधायक काल की याद दिलाती हैं।” उनकी आंखों में चमक आ गई, जब उन्होंने 2000 से 2009 तक रायरंगपुर से विधायक रहने के अनुभव साझा किए।
राष्ट्रपति ने ओडिशा के 1936 में गठन के शताब्दी वर्ष की ओर इशारा करते हुए कहा कि राज्य को 2036 तक समृद्ध और विकसित बनाने के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने विधायकों से अपील की, “ओडिशा को समृद्ध बनाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। हम सब मिलकर इसे साकार करें।”
विधायकों को अनुशासन और नेतृत्व का संदेश
संबोधन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विधायकों को उदाहरण प्रस्तुत करने और अनुशासित भाषण करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “आप विधायक के रूप में समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। अनुशासन के साथ बोलें, ताकि जनता को सकारात्मक संदेश मिले।” यह संदेश वर्तमान राजनीतिक माहौल में विशेष रूप से प्रासंगिक लगा, जहां विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बहसें आम हैं।
राष्ट्रपति ने राज्य की प्रगति पर जोर देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और आदिवासी कल्याण योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने ओडिशा सरकार की पहल की सराहना की, लेकिन साथ ही चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुटता पर बल दिया।
ऐतिहासिक महत्व और भावुक क्षण
यह संबोधन ओडिशा विधानसभा के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ, क्योंकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पहले राष्ट्रपति हैं जो यहां बोल रही हैं। उनके भाषण के दौरान विधानसभा में सन्नाटा छा गया, जब उन्होंने अपनी यात्रा का जिक्र किया। एक विधायक ने बाद में कहा, “राष्ट्रपति जी का भावुक होना हमें प्रेरित करता है। यह ओडिशा के लिए गौरव का क्षण है।”
संबोधन के बाद राष्ट्रपति ने विधायकों से मुलाकात की और राज्य के विकास पर चर्चा की। यह दौरा ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक प्रगति को जोड़ने का प्रतीक बना।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




