Saryu Sandhya News

केंद्र ने पुणे में 820 करोड़ रुपये की क्वांटम कंप्यूटिंग लैब की स्थापना को मंजूरी: भारत क्वांटम क्रांति की ओर बढ़ा

केंद्र ने पुणे में 820 करोड़ रुपये की क्वांटम कंप्यूटिंग लैब की स्थापना को मंजूरी: भारत क्वांटम क्रांति की ओर बढ़ा

नई दिल्ली, 25 नवंबर 2024– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने आज राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) के तहत महाराष्ट्र के पुणे में एक अत्याधुनिक क्वांटम कंप्यूटिंग एप्लीकेशंस लैब (क्यूकैल) की स्थापना को 820 करोड़ रुपये के निवेश के साथ मंजूरी दे दी। यह निर्णय भारत को क्वांटम प्रौद्योगिकी के वैश्विक पटल पर अग्रणी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। लैब का संचालन आईआईटी मद्रास और रीबस क्वांटम (एक अमेरिकी कंपनी) के 50:50 इक्विटी जॉइंट वेंचर के माध्यम से होगा, जो अगले तीन वर्षों में 20 क्यूबिट क्षमता वाला क्वांटम कंप्यूटर विकसित करेगा और सात-आठ वर्षों में इसे 1000 क्यूबिट तक विस्तारित करेगा।

यह मंजूरी 2023 में स्वीकृत 6,003 करोड़ रुपये के एनक्यूएम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य क्वांटम कंप्यूटिंग, संचार, सेंसिंग और सामग्री विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह लैब क्वांटम तकनीक को व्यावसायिक अनुप्रयोगों से जोड़ेगी, जिससे दवा खोज, नई सामग्रियां, जलवायु मॉडलिंग और क्रिप्टोग्राफी में क्रांति आएगी।” कैबिनेट ने इस परियोजना को ‘रणनीतिक महत्वपूर्ण’ बताते हुए त्वरित कार्यान्वयन का निर्देश दिया।

लैब की विशेषताएं: 20 क्यूबिट से 1000 क्यूबिट तक का सफर

पुणे में स्थापित होने वाली यह लैब भारत की पहली ऐसी सुविधा होगी जो क्वांटम कंप्यूटिंग को व्यावहारिक स्तर पर पहुंचाएगी।
– **प्रारंभिक चरण**: अगले तीन वर्षों में 20 क्यूबिट सुपरकंडक्टिंग क्वांटम कंप्यूटर विकसित।
– **दीर्घकालिक लक्ष्य**: सात-आठ वर्षों में 1000 क्यूबिट तक स्केल-अप, जो पारंपरिक सुपरकंप्यूटरों से लाखों गुना तेज गणना कर सकेगा।
– **साझेदारी**: आईआईटी मद्रास की विशेषज्ञता और रीबस क्वांटम की तकनीक का संयोजन। रीबस ने पहले ही 20 क्यूबिट सिस्टम विकसित किया है।
– **अनुप्रयोग**: कैंसर जैसी बीमारियों की दवा डिजाइन, नई बैटरी सामग्री, मौसम पूर्वानुमान, और राष्ट्रीय सुरक्षा में क्रिप्टो ब्रेकिंग।

एनक्यूएम के तहत कुल छह थीमेटिक हब स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें पुणे की यह लैब प्रमुख है। इससे 10,000 से अधिक वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को रोजगार मिलेगा और स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत होगा।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का महत्व: आत्मनिर्भर भारत की नई ऊंचाई

भारत ने 2020 से क्वांटम मिशन पर जोर दिया है। 2023 में कैबिनेट ने 6003 करोड़ रुपये की मंजूरी दी, जो 2023-2031 तक चलेगा। अब तक:
– दिल्ली में क्वांटम हब।
– आईआईएससी बैंगलोर और आईआईटी दिल्ली में सेंटर।
– टाटा इंस्टीट्यूट और आईएसआरओ के साथ साझेदारी।

यह मिशन अमेरिका (10 अरब डॉलर), चीन (15 अरब डॉलर) जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करेगा। पीएम मोदी ने कहा, “क्वांटम तकनीक भारत के भविष्य की कुंजी है। यह अमृत काल में आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनेगा।” विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जीडीपी में 1.5 लाख करोड़ रुपये का योगदान होगा।

| प्रमुख विशेषताएं | विवरण | अपेक्षित परिणाम |
|——————-|——–|——————|
| **निवेश** | 820 करोड़ रुपये | 3 वर्षों में 20 क्यूबिट कंप्यूटर |
| **साझेदार** | आईआईटी मद्रास + रीबस क्वांटम | 50:50 इक्विटी |
| **क्षमता विस्तार** | 1000 क्यूबिट (7-8 वर्ष) | लाखों गुना तेज गणना |
| **कुल मिशन बजट** | 6003 करोड़ | 6 हब, 10,000 नौकरियां |
| **अनुप्रयोग** | दवा, सामग्री, सुरक्षा | 1.5 लाख करोड़ जीडीपी बूस्ट |

प्रतिक्रियाएं: वैज्ञानिक समुदाय में उत्साह

आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी ने इसे “भारतीय क्वांटम सपने की पूर्ति” बताया। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) ने कहा कि कैंसर रिसर्च में क्रांति आएगी। विपक्ष ने भी स्वागत किया, लेकिन फंडिंग में पारदर्शिता की मांग की। सोशल मीडिया पर #QuantumIndia ट्रेंड कर रहा है, जहां युवा इसे “भारत का सिलिकॉन वैली” बता रहे हैं।

निष्कर्ष: क्वांटम युग का भारत

यह लैब भारत को क्वांटम सुपरपावर बनाने का द्वार खोलेगी। पारंपरिक कंप्यूटिंग की सीमाओं को तोड़ते हुए, यह नवाचार, स्वास्थ्य और रक्षा में नई संभावनाएं रचेगी। जैसे-जैसे पुणे लैब काम शुरू करेगी, भारत विश्व क्वांटम दौड़ में मजबूती से आगे बढ़ेगा। यह न केवल तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि युवाओं के लिए अनंत अवसरों का प्रतीक भी। आत्मनिर्भर भारत अब क्वांटम आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है!

saryusandhyanews
Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

Spread the love

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज