पटना, 25 नवंबर 2025 (विशेष संवाददाता)
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में शर्मनाक हार के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) में आंतरिक कलह ने जोर पकड़ लिया है। राज्य प्रगणीय कांग्रेस कमेटी (बीपीसीसी) की अनुशासन समिति ने सोमवार को सात वरिष्ठ नेताओं को छह वर्ष के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई पार्टी के भीतर टिकट वितरण और संगठनात्मक कमजोरियों को लेकर उठ रही असंतोष की आग में तेल का काम कर रही है।
अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि इन नेताओं ने पार्टी की मूल विचारधारा से भटकते हुए संगठनात्मक मर्यादा का उल्लंघन किया। वे केंद्र की मंजूरी से नियुक्त विधानसभा पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में भी अपनी अवज्ञा जारी रखे हुए थे। समिति ने उनकी सफाई को असंतोषजनक बताते हुए पांच अनुशासनिक मानदंडों में से तीन का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
निष्कासित नेताओं के नाम और भूमिकाएं
निष्कासित नेताओं में पूर्व राज्य उपाध्यक्ष से लेकर जिला स्तर के प्रमुख शामिल हैं। इनके नाम इस प्रकार हैं:
- अदित्य पासवान: पूर्व कांग्रेस सेवा दल के उपाध्यक्ष
- शकीलुर रहमान: पूर्व बीपीसीसी उपाध्यक्ष
- राज कुमार शर्मा: पूर्व किसान कांग्रेस अध्यक्ष
- राज कुमार राजन: पूर्व राज्य युवा कांग्रेस अध्यक्ष
- कुंदन गुप्ता: पूर्व अत्यंत पिछड़ा विभाग अध्यक्ष
- कांचना कुमारी: बांका जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष
- रवि गोल्डन: नालंदा जिले से
ये नेता पार्टी के विभिन्न विभागों और जिलों में सक्रिय थे, लेकिन हाल के चुनावों में उन्होंने सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया के माध्यम से पार्टी नेतृत्व की आलोचना की, जिसमें टिकटों की खरीद-फरोख्त जैसे आधारहीन आरोप भी शामिल थे।
चुनावी हार का पृष्ठभूमि: 61 सीटों पर सिर्फ 6 पर जीत
यह कार्रवाई बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के ठीक बाद आई है, जहां कांग्रेस ने महागठबंधन के हिस्से के रूप में 61 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन केवल 6 पर ही जीत हासिल की। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार बनने के बाद पार्टी में असंतोष की लहर दौड़ गई। असंतुष्ट नेताओं का आरोप है कि टिकट वितरण में प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता दी गई, जिससे जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा। इसके अलावा, गठबंधन दलों के बीच समन्वय की कमी और उम्मीदवार चयन में रणनीतिक चूक ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया।
बीपीसीसी अध्यक्ष राजेश राम ने सभी जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों को निर्देश जारी कर कहा, “चुनावी नतीजे केवल जीत-हार के बारे में नहीं हैं, बल्कि सुधार के क्षेत्रों का संकेत देते हैं। यह आत्ममंथन, एकजुट प्रयासों और संगठन मजबूती का समय है।” उन्होंने जिलों से राजनीतिक, संगठनात्मक और क्षेत्रीय कारकों पर विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट मांगी है, जिसमें मतदान प्रतिशत, बूथ स्तर की गतिविधियां, अभियान पहुंच और स्थानीय मुद्दों का विश्लेषण शामिल हो।
असंतुष्टों का विरोध: ‘बलि का बकरा बनाने की साजिश’
निष्कासित नेताओं और अन्य 43 असंतुष्ट नेताओं ने इस कार्रवाई को ‘बलि का बकरा बनाने’ की कोशिश करार दिया है। एक असंतुष्ट नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ये समर्पित कार्यकर्ता वे हैं जिन्होंने चुनाव से पहले कमजोर उम्मीदवारों और गठबंधन में तालमेल की कमी पर चेतावनी दी थी। वरिष्ठ नेताओं की नैतिक चूक और शर्मनाक हार को छिपाने के लिए इन्हें निशाना बनाया जा रहा है।”
एक अन्य ने अनुशासन समिति अध्यक्ष यादव की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि चुनाव के दौरान वे एक भाजपा उम्मीदवार की जीत का जश्न क्यों मना रहे थे। पार्टी के एक वर्ग ने समिति की वैधता पर भी सवाल खड़े किए, दावा किया कि यह ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) से औपचारिक अधिसूचना के बिना गठित है।
सोमवार को ही बिहार महिला कांग्रेस कमेटी की प्रमुख शरबत जहां फातिमा ने टिकट न मिलने के विरोध में इस्तीफा दे दिया, जो टिकट वितरण को लेकर उबलते असंतोष को दर्शाता है।
आगे की राह: संगठन मजबूती पर जोर
बीपीसीसी अध्यक्ष राजेश राम ने आगामी ‘वोट चोर, गद्दी छोड़ महारैली’ को लोकतंत्र की रक्षा का आह्वान बताया। उन्होंने कहा, “यह केवल राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि मतदाता दमन, लक्षित वोटर हटाने और डेटा हेरफेर के आरोपों के खिलाफ लोकतंत्र और संविधान की सुरक्षा का संकल्प है। 14 दिसंबर को इसे ऐतिहासिक बनाना होगा।”
यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए एक सबक है कि चुनावी हार के बाद आंतरिक एकता कितनी महत्वपूर्ण है। यदि असंतोष को समय रहते संभाला न गया, तो यह पार्टी की बिहार इकाई को और कमजोर कर सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें एआईसीसी के हस्तक्षेप पर टिकी हैं।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




