नई दिल्ली, 24 नवंबर 2025: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले भव्य समारोह में, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्या कांत ने आज भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ ग्रहण की। यह समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और अन्य उच्च पदाधिकारी उपस्थित थे। न्यायमूर्ति कांत ने राष्ट्रपति के समक्ष शपथ ली, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत निर्धारित है। उनका कार्यकाल लगभग 15 महीनों का होगा, और वे फरवरी 2027 में सेवानिवृत्त होंगे।
यह नियुक्ति 31 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रपति द्वारा की गई थी, जब उन्होंने न्यायमूर्ति कांत को अगले सीजेआई के रूप में नामित किया। वे पूर्व सीजेआई जस्टिस बी.आर. गवई के स्थान पर पदभार संभाल रहे हैं। शपथ ग्रहण के बाद, न्यायमूर्ति कांत ने कहा, “न्यायपालिका का मूल्यांकन उसके फैसलों से होता है, न कि शब्दों से। मैं संविधान की रक्षा करने और न्याय की पहुंच को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हूं।”
एक साधारण शुरुआत से न्याय की ऊंचाइयों तक
न्यायमूर्ति सूर्या कांत का जन्म हरियाणा के हिसार जिले में एक साधारण परिवार में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर प्राप्त की और कानून की डिग्री के बाद वकालत में कदम रखा। मात्र 38 वर्ष की आयु में वे हरियाणा सरकार द्वारा अतिरिक्त महाधिवक्ता (एडिशनल एडवोकेट जनरल) नियुक्त किए गए, जो उस समय का एक रिकॉर्ड था। 7 जुलाई 2000 को वे हरियाणा के महाधिवक्ता बने, जहां उन्होंने संवैधानिक और नागरिक मामलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
जनवरी 2004 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के बाद, उनका करियर तेजी से ऊंचा चढ़ा। फरवरी 2019 में वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट में उनके छह वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने 80 से अधिक महत्वपूर्ण फैसले लिखे, जो मानवाधिकार, लिंग न्याय, शिक्षा और जेल सुधारों पर केंद्रित रहे। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी उन्होंने संतुलित और प्रगतिशील फैसले दिए, जो सामाजिक न्याय को मजबूत करने वाले साबित हुए।
उल्लेखनीय फैसले: संविधान की रक्षा का प्रतीक
न्यायमूर्ति कांत के फैसलों ने हमेशा समसामयिक मुद्दों पर नजर रखी है। वे अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण को बरकरार रखने वाली बेंच का हिस्सा थे, जिसने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन को वैध ठहराया। भ्रष्टाचार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लिंग समानता पर उनके फैसलों ने न्यायपालिका को नई दिशा दी। उदाहरण के तौर पर, जितेंद्र सिंह बनाम पर्यावरण मंत्रालय मामले में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने गरीबों और वंचित वर्गों के लिए कानूनी सहायता को मजबूत किया। उनके फैसलों में जेल सुधारों पर जोर दिया गया, जहां उन्होंने कैदियों के अधिकारों को प्राथमिकता दी। हाल ही में, नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और अभिव्यक्ति की सीमाओं पर उनके विचारों ने राष्ट्रीय बहस छेड़ी। ये फैसले न केवल कानूनी दृष्टि से मजबूत हैं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के उत्प्रेरक भी साबित हुए।
नई चुनौतियां, नई उम्मीदें
सीजेआई के रूप में न्यायमूर्ति कांत का कार्यकाल एक ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब न्यायपालिका विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रही है—जैसे लंबित मामलों का बोझ, तकनीकी एकीकरण और संवैधानिक व्याख्या के विवाद। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके अनुभव से सुप्रीम कोर्ट में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने शपथ ग्रहण के बाद कहा, “न्यायमूर्ति कांत का नेतृत्व न्याय व्यवस्था को और मजबूत करेगा।”
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




